पिछले साल विभाग ने लक्ष्य तो 85 हजार हेक्टेयर का रखा था लेकिन वर्षा अधिक होने से जिले में एक लाख 35 हजार हेक्टेयर में धान बोया गया था। …और पढ़ें

HighLights
- कम बारिश का पूर्वानुमान: धान के रकबे पर मंडराया संकट
- लक्ष्य बनाम वास्तविकता: पिछले साल के मुकाबले इस बार कम बुवाई के आसार
- कृषि विभाग का प्लान-बी: धान घटा तो बढ़ेगा बाजरा और दलहन का उत्पादन
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर जिले में इस बार धान की बुवाई का रकबा मानसून की वर्षा पर टिका हुआ है। यदि वर्षा कम होती है तो धान का रकबा घट जाएगा और यदि वर्षा अच्छी होती है तो रकबा पिछले साल से अधिक हो जाएगा।
हालांकि कृषि विभाग ने 95 हजार हेक्टेयर में धान की बुवाई का लक्ष्य रखा है। पिछले साल विभाग ने लक्ष्य तो 85 हजार हेक्टेयर का रखा था लेकिन वर्षा अधिक होने से जिले में एक लाख 35 हजार हेक्टेयर में धान बोया गया था। यानि लक्ष्य से 50 हजार हेक्टेयर बढ़ गया था। यदि धान का रकबा घटता है तो जिले में दलहनी फसलों का रकबा बढ़ जाएगा।
क्यों रकबा घटने की है उम्मीद: इस बार मौसम विभाग ने मानसून सीजन में सामान्य वर्षा की तुलना में 90 प्रतिशत वर्षा होने का पूर्वानुमान जताया है। यानि 10 प्रतिशत वर्षा कम होगी। यदि अंचल में यह पूर्वानुमान सटीक बैठा तो निश्चित तौर पर धान की बुवाई पर असर पड़ेगा। यनि वर्षा कम होगी तो धान की बुवाई का रकबा 95 हजार हेक्टेयर से कम रह जाएगा। यदि वर्षा ठीक ठाक या अच्छी होती तो रकबा एक लाख हेक्टेयर को पार कर सकता है। हालांकि कृषि महकमे के अफसरों का कहना है वर्षा सामान्य भी होती है तो पिछले साल जितने रकबे में धान की बुवाई नहीं हो पाएगी।
धान का रकबा कम होता है तो बढ़ती है दूसरी फसल: अंचल में यदि धान का रकबा कम होता है, तभी खरीफ की अन्य फसलें मसलन बाजरा, तिल, मूंग, अरहर आदि का रकबा बढ़ता है। क्योंकि यदि वर्षा ज्यादा होती है तो दलहनी फसलें नहीं हो पाती, ऐसे में किसानों के सामने धान की ही फसल रह जाती है। वहीं वर्षा कम होती है तो धान की बुवाई पानी की वजह से कम होती है और दलहनी फसल का रकबा बढ़ जाता है।
अन्य खरीफ की फसलों के लिए यह है बुवाई का लक्ष्य
- बाजरा: मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की नीति और कम सिंचित क्षेत्रों की अनुकूलता से अंचल में बाजरे का रकबा काफी मजबूत है। इस साल जिले में 25 हजार हेक्टेयर में बाजरा बोने का अनुमान है।
- दलहन फसलें: जिले में खरीफ के दौरान दलहन में मुख्य रूप से उड़द की बुवाई की जाती है। इस बार इसका व्यक्तिगत लक्ष्य लगभग 10,000 हेक्टेयर रखा गया है। अंचल के 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की बुवाई की जाएगी।
- तिलहन फसलें: कम पानी और पथरीली पहाड़ी ढलानों के लिए अनुकूल तिल की बुवाई का लक्ष्य करीब 6,500 हेक्टेयर निर्धारित है। धान की तरफ किसानों का रुझान बढ़ने से ग्वालियर जिले में सोयाबीन का रकबा लगातार सीमित हुआ है। इस साल यह करीब 3000 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बोई जाएगी।
- ग्वार, मक्का व अन्य चारा फसलें: पशुओं के हरे चारे और ग्वार की बुवाई के लिए जिले में लगभग 4,000 हेक्टेयर का का लक्ष्य रखा गया है।
धान की बुवाई का रकबा वर्षा के ऊपर निर्भर करेगा। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार वर्षा कम होगी। यदि वर्षा कम होगी तो धान का रकबा घट जाएगा। यदि वर्षा सामान्य या अधिक होगी तो धान का रकबा बढ़ेगा। यदि धान का रकबा कम होता है तो प्रयास रहेगा कि अंचल में दलहन का रकबा बढ़ जाए। – आरबीएस जाटव, उप संचालक कृषि
