मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में गिरफ्तारी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सभी जिलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह परिपत्र उच्चतम न्यायालय के 6 नवंबर 2025 के आदेश के आधार पर जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसे गिरफ्तारी के कारण बताना उसका मौलिक अधिकार है। यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत सुनिश्चित किया गया है। 

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नए निर्देशों के अनुसार, अब पुलिस केवल मौखिक जानकारी देकर गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी। गिरफ्तार व्यक्ति को लिखित रूप में स्पष्ट कारण देना अनिवार्य होगा। यह जानकारी ऐसी भाषा में दी जाएगी, जिसे वह आसानी से समझ सके। साथ ही यह भी तय किया गया है कि यह लिखित जानकारी गिरफ्तारी के समय या फिर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से कम से कम दो घंटे पहले उपलब्ध कराई जाए।

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परिपत्र में यह भी कहा गया है कि इस पूरी प्रक्रिया का उल्लेख गिरफ्तारी पंचनामा और संबंधित दस्तावेजों में दर्ज करना जरूरी होगा। इसके लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के प्रावधानों का पालन किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने साफ किया है कि यदि इन नियमों का पालन नहीं किया गया, तो गिरफ्तारी को अवैध माना जा सकता है। संबंधित अधिकारी के खिलाफ अदालत की अवमानना या विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। इतना ही नहीं, आरोपी को तत्काल रिहाई का अधिकार भी मिल सकता है। यह कदम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी पुलिस अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।



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