ग्वालियर में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा युवाओं को कर्ज और आत्महत्या की ओर धकेल रहा है। हाइटेक सट्टेबाज सक्रिय हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई कमजोर होने से सिस …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 17 Apr 2026 09:45:08 AM (IST)Updated Date: Fri, 17 Apr 2026 09:45:08 AM (IST)

क्रिकेट ऑनलाइन सट्टे के उलझकर कर्ज में डूब रहे युवा, आत्महत्या को मजबूर, पुलिस खाली हाथ
शहर में क्रिकेट पर सट्टे का खूनी सिंडिकेट युवाओं के लिए मौत बनता जा रहा है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा युवाओं को कर्ज और आत्महत्या तक ले जा रहा
  2. ग्वालियर में सट्टा माफिया हाइटेक तरीके से सक्रिय है लगातार
  3. पुलिस की कार्रवाई कमजोर, बड़े सट्टेबाज अब भी पकड़ से बाहर

अमित मिश्रा। नईदुनिया प्रतिनिधि ग्वालियर। शहर में क्रिकेट पर सट्टे का खूनी सिंडिकेट युवाओं के लिए मौत बनता जा रहा है। क्रिकेट पर आनलाइन सट्टे के मायाजाल में उलझकर युवक कर्ज में डूब रहे हैं। कर्ज न चुकाने पर आत्महत्या करने तक के लिए मजबूर हो रहे हैं।

हाल ही में एक के बाद एक आत्महत्या के दो ऐसे मामले सामने आए, जिनमें मौत की कहानियां रौंगटे खड़े कर देने वाली हैं। आत्महत्या की इन दो घटनाओं के बाद भी दु:खद पहलू यह है- जहां सट्टा माफिया हाइटेक होकर रोज करोड़ों के दांव लगा रहा है और हर मोर्चे पर कड़ी मुस्तैदी का दावा करने वाली ग्वालियर पुलिस को यह नजर ही नहीं आ रहे।

इंडियन प्रीमियर लीग शुरू हुए 20 दिन हो चुके हैं, लेकिन ग्वालियर पुलिस सट्टेबाजों पर छुटपुट कार्रवाई कर खुद की पीठ थपथपा रही है। ग्वालियर पुलिस को यह सट्टेबाज आखिर क्यों नजर नहीं आ रहे, जो इतने बड़े स्तर पर सट्टे का काला कारोबार कर रहे हैं और इनके कारण प्रताड़ित होकर युवक आत्महत्या तक कर रहे हैं।

पुलिस की दिखावे की कार्रवाई, सिस्टम पर उठ रहे सवाल

पुलिस ने हाल ही में कुछ कार्रवाई क्रिकेट पर आनलाइन सट्टे के मामले में की, लेकिन कार्रवाई सिर्फ मोहरों पर हुई। सट्टे की जड़ में पहुंचने में पुलिस नाकाम रही।

हाइटेक सट्टेबाज, क्राइम ब्रांच और थानों का कमजोर नेटवर्क

सट्टा माफिया हाइटेक हो चुका है। नई आइडी, सर्वर से हर साल काम शुरू होता है। वीपीएन और डार्कवेब का इस्तेमाल यह कर रहे हैं। क्राइम ब्रांच और थानों का कमजोर नेटवर्क इन्हें पकड़ने में नाकाम साबित हो रहा है।

म्यूल खातों का इस्तेमाल

साइबर ठगी की तरह अब क्रिकेट् पर सट्टे के रुपये की हेराफेरी में भी म्यूल खातों का इस्तेमाल हो रहा है।

सट्टा माफिया की कमर तोड़ सकती है पुलिस

संगठित अपराध की धारा में एफआइआर दर्ज की जा सकती है। सट्टे से अर्जित संपत्ति अटैच की जा सकती है।

केस 1- 20 लाख का कर्ज होने पर लगाई फांसी

सिकंदर कंपू के पास रहने वाले 47 साल के रवि चौहान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार शाम को उसने फांसी लगाई। मरने से पहले सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उसने राजेंद्र शर्मा और रौनक गुप्ता निवासी डबरा का नाम लिखकर आत्महत्या की। उसने ऑनलाइन सट्टे में 20 लाख रुपये का कर्ज होने का जिक्र किया।

केस 2- ऑनलाइन सट्टा में फंसकर की आत्महत्या

28 अक्टूबर 2025 को हुरावली ए-ब्लॉक में रहने वाले 29 वर्षीय मनीष पुत्र सोबरन सिंह किरार ने फांसी लगा ली। वह पिता से घर जाने की कहकर खेत से निकला था। घर आकर उसने फांसी लगा ली। उसने ऑनलाइन सट्टा लगवाने वाले सट्टा माफिया के जाल में फंसकर आत्महत्या करने का जिक्र किया था।



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