नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मप्र में यात्री बसें सुरक्षित नहीं हैं। प्रदेशभर में यात्री बसों में हो रहे हादसों ने पूरे परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आए दिन यात्री बसों में हादसे जान पर भारी हैं। बसों में अलग-अलग कारणों से आग लगने के हादसे हो रहे हैं और मानकों की अनदेखी के कारण जनता की आफत होती है। हाल में जबलपुर हाई कोर्ट के निर्देश के बाद बसों में प्रवेश व निर्गम द्वार सेपरेट होने के साथ अलग से एक आपातकालीन निकास बस में होना चाहिए, यह निर्देश दिए गए।

आदेश है, लेकिन मैदान में अमला नहीं

प्रदेश के परिवहन आयुक्त ने आदेश तो कार्रवाई के जारी किए, लेकिन मैदान में अमल नहीं दिखा। परिवहन विभाग के अधिकारियों व अमले ने कार्रवाई तक शुरू नहीं की है। शुक्रवार की रात इंदौर से ग्वालियर की ओर रही बस में शार्ट सर्किट के कारण आग लग गई और एक मासूम की मौत हो गई। भीषण हादसे में सभी यात्रियों की जान खतरे में थी, बस में आपातकाल द्वार नहीं था। इस तरह प्रदेश में यात्री बसों को लेकर अनदेखी का खेल खतरनाक हो रहा है।

जानिए कोर्ट ने क्या आदेश दिया है

जबलपुर हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान बसों के गेटों को लेकर सख्त आदेश दिए हैं। यात्री बसों में दो गेट प्रवेश व निकास और एक आपातकालीन निकास बस के अंदर होना चाहिए। इसी आदेश के परिपालन में परिवहन आयुक्त ने सभी आरटीए को इसके पालन को लेकर आदेश जारी किए हैं। इन मानकों का पालन न करने वाली यात्री बसों के परमिट और फिटनेस निरस्त करने के आदेश भी दिए गए हैं। इस मामले में कोर्ट के आदेश तो स्पष्ट हैं लेकिन प्रदेशभर में सड़कों पर परिवहन विभाग की कार्रवाई अस्पष्ट है।

ग्वालियर में अब सभी बस आपरेटरों को सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया है जिसमें वह अपनी बसों को परिवहन कार्यालय में जांच कराएंगे और अगर आगे मानकों का पालन नहीं पाया गया तो फिटनेस व परमिट निरस्त करने का दावा अफसरों ने किया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में आरटीओ को निर्देशित किया है कि स्टेज कैरिज और पर्यटक बसों द्वारा नियम 164 का उल्लंघन किया जा रहा है, तो उनका संचालन 45 दिनों के भीतर बंद किया जाए।

यात्री बसों की स्थिति: बेधड़क दौड़, एंट्री प्वाइंट-हाईवे पर चेकिंग नहीं

प्रदेश में यात्री बसों को लेकर बिना कायदों का पालन करे ही बसें दौड़ रहीं हैं, बस में हादसों का सिलसिला जारी है लेकिन विभाग ने कोई ठोस कार्ययोजना तक नहीं बनाई है। परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने इसको लेकर आदेश जारी कर दिए, लेकिन उसका प्रभाव अभी तक कागजों में ही है। प्रदेश में सड़कों पर परिवहन विभाग का अमला उतरा तक नहीं है जांच और कार्रवाई तो आगे की बात है। हादसों के बाद भी परिवहन विभाग के अफसरों की नींद नहीं टूट रही है।

दर्दनाक हादसे हो चुके, सबक नहीं

बसों में आग लगने और यात्रियों के बाहर न आ पाने के हादसे कई बार हो चुके हैं। हाल में राजस्थान में 20 लोग बस में जिंदा जल गए थे। बस के आटोमैटिक लाक के कारण कोई बाहर नहीं आ सका। शुक्रवार की रात शाजापुर के पास इंदौर से ग्वालियर आ रही बस में आग लग गई और चार साल के मासूम की मौत हो गई। दर्दनाक हादसों के बाद भी सिस्टम ने सबक नहीं लिया है।

ग्वालियर में एक हजार से ज्यादा बसें

ग्वालियर में एक हजार से ज्यादा यात्री बसें, शैक्षणिक संस्थान की मिलाकर हैं। ग्वालियर आरटीओ विक्रमजीत सिंह कंग ने बताया कि सभी बसों के आपरेटरों को सात दिन का समय दिया गया है। सात दिन में जिला परिवहन कार्यालय में आकर अपनी बसों को चेक कराना होगा और गेट न होने पर उसका पालन करना होगा। जांच के बाद अगर मानकों के अनुसार गेट नहीं मिले तो कार्रवाई की जाएगी।



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