नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गोपालपुरा सुसेरा कोठी इलाके में एक आवारा कुत्ते ने तीन साल की मासूम बच्ची पर प्राणघातक हमला कर दिया। कुत्ते ने मासूम के सिर को अपने जबड़ों में जकड़कर उसकी खाल तक चबा डाली। गंभीर रूप से घायल बच्ची को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कुत्ते ने मानवी के सिर को बुरी तरह नोंचना शुरू कर दिया
पीड़ित बच्ची के पिता कमल सिंह ने बताया कि उनकी तीन वर्षीय बेटी मानवी घर के बाहर खेल रही थी। जैसे ही वह घर के अंदर प्रवेश करने लगी, पीछे से एक आवारा कुत्ते ने उस पर झपट्टा मार दिया। कुत्ते ने सीधे मानवी के सिर पर हमला किया, जिससे वह संभल नहीं पाई और जमीन पर गिर गई। इसके बाद कुत्ते ने उसके सिर को बुरी तरह नोंचना शुरू कर दिया।
बच्ची गहन निगरानी में
कुत्ते का हमले से मानवी के सिर में गहरे जख्म हो गए हैं। स्वजन के अनुसार, कुत्ते ने सिर के एक हिस्से की खाल को पूरी तरह चबा डाला था। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर जब तक घरवाले बाहर आए और कुत्ते को भगाया, तब तक मासूम लहूलुहान हो चुकी थी।
स्वजन ने तत्काल घायल मानवी को ‘हजार बिस्तर अस्पताल’ पहुंचाया। वहां डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के तौर पर उसे एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया। घाव की गंभीरता और सिर की चोट को देखते हुए उसे तुरंत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल विशेषज्ञों की टीम बच्ची का उपचार कर रही है और उसे गहन निगरानी में रखा गया है।
90 प्रतिशत कुत्तों को नहीं लगता ‘बूस्टर डोज’
रेबीज के बढ़ते खतरे के पीछे एक बड़ी तकनीकी वजह सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुत्तों को एंटी-रेबीज वैक्सीन का पहला डोज लगने के 21 दिन बाद दूसरा और फिर हर साल बूस्टर डोज लगना अनिवार्य है। नगर निगम के अभियान के तहत करीब 90 प्रतिशत कुत्तों को पहला टीका तो लग जाता है, लेकिन ‘बूस्टर डोज’ नहीं लग पाता। इस स्थिति में वैक्सीन सिर्फ 50 प्रतिशत ही असरदार रह जाती है, जिससे संक्रमित कुत्तों के संपर्क में आते ही वे भी रेबीज का शिकार हो जाते हैं।
तीन माह में सात मौत, हर दिन अस्पतालों में पहुंच रहे 200 से ज्यादा डाग बाइट के शिकार
जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, शहर में कुत्ते का आक्रामक होते जा रहे हैं। शहर प्रमुख अस्पतालों में हर दिन डाग बाइट के मामलों में इजाफा हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले पौने तीन महीनों में ही रेबीज संक्रमण की वजह से सात लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से दो मृतक ग्वालियर शहर के ही निवासी थे। शहर के सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने वाले काफी संख्या में पहुंच रहे हैं।
हजार बिस्तर अस्पताल में ही रोजाना 60 से 70 मरीज पहला डोज लगवाने पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल (मुरार) व हजीरा सिविल अस्पताल में भी औसतन 100 से अधिक केस प्रतिदिन दर्ज हो रहे हैं। पिछले तीन महीनों में शहर के अलग-अलग इलाकों में रेबीज के लक्षणों वाले सात कुत्ते मिले थे, जिनकी भी मौत हो गई।
जरूरी नहीं कि हर काटने वाला कुत्ता रेबीज संक्रमित हो
नगर निगम के एबीसी नोडल अधिकारी केशव चौहान का कहना है कि गर्मी में कुत्तों में भूख और प्यास के कारण चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, जिसे आक्रमकता (अग्रेशन) कहते हैं। हर काटने वाला कुत्ता रेबीज से ग्रसित नहीं होता। यह जांच के बाद ही स्पष्ट होता है। हम संक्रमण रोकने के लिए लगातार वैक्सीनेशन अभियान चला रहे हैं और सूचना मिलने पर संदिग्ध कुत्तों को अलग रखा जाता है।
ऐसे पहचानें: पालतू या गली का कुत्ता क्या संक्रमित है?
नगर निगम की टीम और विशेषज्ञों ने रेबीज संक्रमित कुत्तों के कुछ खास लक्षण बताए हैं-
- खाना-पीना छोड़ना: कुत्ता पानी और भोजन से पूरी तरह दूरी बना लेता है।
- अत्यधिक आक्रामकता: क्षेत्र से बाहर निकलकर हर चीज (इंसान, बेजान वस्तु) को काटने दौड़ता है।
- आवाज में बदलाव: संक्रमित कुत्ते के गले की मांसपेशियां प्रभावित होने से उसकी आवाज पूरी तरह नहीं निकल पाती।
- कमांड फालो न करना: पालतू कुत्ता भी मालिक की बात सुनना बंद कर देता है।
बचाव के लिए क्या करें
- यदि कुत्ता काट ले, तो घाव को तत्काल बहते पानी और साबुन से 15 मिनट तक धोएं।
- बिना देरी किए अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज इंजेक्शन का कोर्स पूरा करें।
- गली के कुत्तों को परेशान न करें और उनके पास पानी का कटोरा रखें ताकि गर्मी के कारण उनका गुस्सा शांत रहे।
