राजधानी के एम्स भोपाल की स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। इस बार शिकायत अस्पताल के नर्सिंग और हाउसकीपिंग स्टाफ को लेकर सामने आई है। भोपाल के अपर कलेक्टर मनोज वर्मा की 79 वर्षीय सास ललिता सिन्हा का हिप फ्रैक्चर के बाद एम्स के चार्जेबल प्राइवेट वार्ड में इलाज चल रहा है। परिजनों का आरोप है कि बेहतर सुविधाओं के लिए निजी वार्ड लेने के बावजूद उन्हें बुनियादी देखभाल के लिए परेशान होना पड़ रहा है।


बार-बार बुलाने पर भी देर से पहुंचता है स्टाफ

अपर कलेक्टर मनोज वर्मा ने बतााया कि जरूरत पड़ने पर नर्सिंग स्टाफ को कई बार बुलाना पड़ता है और कई मामलों में 15 से 20 मिनट बाद सहायता मिलती है। उनका कहना है कि वृद्ध मरीजों को तत्काल देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन व्यवस्था अपेक्षा के अनुरूप नहीं है।  उन्होने कहा कि जब मै एक अधिकारी हूं मुझे सब जानते हैं इसके बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। मैने स्टॉफ को बताया भी लेकिन किसी सुनी नहीं कल लिखित में शिकायत करेंगे। 

डायपर बदलने के लिए मांगे अतिरिक्त पैसे

परिजनों का आरोप है कि हाउसकीपिंग स्टाफ ने डायपर बदलने को अपनी जिम्मेदारी मानने से इनकार करते हुए इसके लिए अतिरिक्त भुगतान की बात कही। इसके बाद परिवार को मरीज की देखभाल के लिए निजी केयरटेकर रखना पड़ा।

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दो घंटे तक सफाई नहीं हुई

परिजनों का दावा है कि एक दिन मरीज के मल त्याग के बाद काफी देर तक कोई सफाई करने नहीं आया, जिससे मरीज को असुविधा का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि इसी कारण डॉक्टरों की सलाह के बावजूद मरीज समय पर भोजन भी नहीं कर सकीं।

डॉक्टरों पर नहीं, व्यवस्था पर सवाल

अपर कलेक्टर मनोज वर्मा ने कहा कि उन्हें डॉक्टरों के इलाज और व्यवहार से कोई शिकायत नहीं है। उनकी नाराजगी केवल नर्सिंग और हाउसकीपिंग व्यवस्था को लेकर है। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद भर्ती बुजुर्ग मरीजों की साफ-सफाई और देखभाल अस्पताल की जिम्मेदारी है और इसमें संवेदनशीलता दिखनी चाहिए।

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एम्स प्रबंधन ने मांगी लिखित शिकायत

एम्स भोपाल के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम भट्टी ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही परिजनों से संपर्क किया गया था। उन्हें कहा गया कि यदि उनके साथ किसी प्रकार की लापरवाही या अभद्रता हुई है तो इसकी लिखित शिकायत दें, ताकि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। हालांकि, अब तक अस्पताल प्रबंधन को इस संबंध में कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। भट्टी ने कहा कि परिजनों ने दोपहर में यह मामला उठाया था। उसी समय उनसे आग्रह किया गया था कि वे शिकायत लिखित रूप में दें, जिससे तत्काल जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि एम्स प्रबंधन मरीजों की शिकायतों को गंभीरता से लेता है और लिखित शिकायत मिलने पर नियमानुसार तत्काल जांच शुरू की जाएगी।

 



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