मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी अब सड़कों पर विरोध के रूप में नजर आने लगी है। माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों ने बुधवार को भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के बाहर प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई। लंबे समय से नियुक्ति आदेश जारी न होने से आक्रोशित अभ्यर्थियों ने साफ कहा कि यदि जल्द प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

प्रदर्शन के बाद शाम को जारी हुए आदेश, 4 हजार शिक्षकों को मिली राहत

भोपाल में दिनभर चले प्रदर्शन के बाद सरकार ने तेजी दिखाते हुए शाम को 4,000 माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के नियुक्ति आदेश जारी कर दिए। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह बड़ा फैसला माना जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार चयनित अभ्यर्थी 12 से 18 मई 2026 के बीच ऑनलाइन माध्यम से स्कूलों का चयन (चॉइस फिलिंग) कर सकेंगे। अभ्यर्थियों को अपने जिले या संभाग के सभी स्कूलों को प्राथमिकता क्रम में भरना अनिवार्य होगा। भाग ने चेतावनी दी है कि तय समय में विकल्प नहीं भरने पर बची हुई रिक्तियों के आधार पर ही स्कूल आवंटन किया जाएगा। साथ ही दस्तावेज सत्यापन के बाद ही अंतिम नियुक्ति दी जाएगी।

9 महीने बाद भी नियुक्ति नहीं, बढ़ा असंतोष

करीब 10,700 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी हुए लगभग 9 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न नियुक्ति आदेश जारी हुए हैं और न ही चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो सकी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया कई चरणों से गुजरने के बाद इस स्थिति में पहुंची है, लेकिन अंतिम चरण पर आकर पूरी प्रक्रिया ठहर गई है। भर्ती की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। इसके बाद 2023 में पात्रता परीक्षा आयोजित हुई, अप्रैल 2025 में चयन परीक्षा ली गई और सितंबर 2025 में परिणाम घोषित कर चयन सूची जारी कर दी गई। इसके बावजूद अब तक जॉइनिंग की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

नियमों की अनदेखी का आरोप

अभ्यर्थियों ने विभाग पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि परीक्षा संचालन नियम पुस्तिका के अनुसार चयन सूची जारी होने के तीन माह के भीतर नियुक्ति आदेश जारी करना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां 8 से 9 महीने बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया अधूरी है। चयनित उम्मीदवारों का यह भी कहना है कि अब तक पात्र-अपात्र सूची जारी नहीं हुई और न ही चॉइस फिलिंग कराई गई। कई बार विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला है।

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शिक्षकों की कमी के बीच भर्ती अटकी

प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद भर्ती प्रक्रिया का अटका रहना भी सवाल खड़े कर रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, करीब 1,895 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 29 हजार से ज्यादा स्कूलों में लगभग एक लाख शिक्षकों के पद खाली हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर है, जहां बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि जब स्कूलों में शिक्षकों की इतनी जरूरत है, तो नियुक्ति में देरी समझ से परे है।

लंबा इंतजार बना आर्थिक और मानसिक बोझ

अभ्यर्थियों ने बताया कि वर्षों से चल रही भर्ती प्रक्रिया ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला है। कई उम्मीदवार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और नौकरी की उम्मीद में लगातार संघर्ष कर रहे हैं। कुछ अभ्यर्थी कोचिंग पढ़ाकर या छोटे-मोटे काम करके गुजारा कर रहे हैं, जबकि कई परिवार ऐसे भी हैं जिन पर आर्थिक संकट गहरा गया है। लंबे इंतजार ने युवाओं के व्यक्तिगत जीवन, शादी और भविष्य की योजनाओं पर भी असर डाला है।

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बार-बार आश्वासन, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं

अभ्यर्थियों का कहना है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 तक कई बार भोपाल आकर अधिकारियों से मुलाकात की गई। हर बार जल्द प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया गया। मार्च और अप्रैल तक चॉइस फिलिंग और जॉइनिंग की बात कही गई थी, लेकिन समय बीतने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि अब और इंतजार संभव नहीं है और सरकार को जल्द निर्णय लेना होगा।

 



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