धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के फैसले का मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने भोजशाला को संरक्षित स्मारक और मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानते हुए महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। इससे श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में भोजशाला की गरिमा और मजबूत होगी।

ये भी पढ़ें-  Bhopal: लव जिहाद और मुस्लिम युवक की पिटाई के बाद भोपाल में बवाल, हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष पर FIR; 11 गिरफ्तार

सीएम ने कोर्ट के उस निर्देश का भी स्वागत किया है, जिसमें मां वाग्देवी की प्रतिमा को ब्रिटेन (यूके) से वापस भारत लाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से विचार करने को कहा गया है। सीएम ने कहा कि इस दिशा में वह भी आवश्यक प्रयास करेगी। सीएम यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा सर्वधर्म समभाव, सामाजिक समरसता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देती रही है। राज्य सरकार न्यायालय के फैसले का पूरा सम्मान करती है और प्रदेश में सौहार्द, सांस्कृतिक गौरव तथा सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही सीएम ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं में राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी। 

ये भी पढ़ें-  फेक करेंसी केस में बड़ा खुलासा: बर्खास्त BSF जवान देता था तस्करों को इनपुट, भोपाल तक पहुंचा नेटवर्क

हाई कोर्ट का फैसला एक नजर में

बता दें कि हाई कोर्ट ने कहा है कि भोजशाला एक संरक्षित स्मारक है। भोजशाला वाग्देवी का मंदिर है। यहां हिंदुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया गया है। जबकि, मुस्लिम समुदाय द्वारा नमाज अदा करने का अधिकार निरस्त कर दिया गया है। अब भोपाल शाला का प्रबंधन और नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) करेगा। इतना ही नहीं, हाई कोर्ट ने भारत सरकार को लंदन के संग्रहालय से मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने संबंधी प्रस्तुतिकरण पर विचार करने के निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम समुदाय अन्य उपयुक्त भूमि आवंटन के लिए सरकार के समक्ष प्रस्तुतिकरण दे सकता है।

 





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *