राजधानी भोपाल के चर्चित 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज मामले में निलंबित किए गए सभी सात इंजीनियरों को लोक निर्माण विभाग ने बहाल करने की तैयारी कर ली है। इनमें दो चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। इस ओवरब्रिज के डिजाइन और निर्माण को लेकर देशभर में मध्य प्रदेश सरकार और पीडब्ल्यूडी की काफी आलोचना हुई थी। जानकारी के अनुसार, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने बहाली संबंधी नोटशीट पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि संबंधित अधिकारी जून 2025 से निलंबित हैं, इसलिए उन्हें पुनः सेवा में लिया जाए। इसके बाद विभाग ने बहाली आदेश जारी करने की तैयारी कर रहा है।  सस्पेंशन के दौरान दोनों तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियरों को ईएनसी कार्यालय से संबद्ध किया गया था, जबकि अन्य इंजीनियर भोपाल के फील्ड कार्यालयों में अटैच थे। अब बहाली के बाद सभी अधिकारियों की पदस्थापना ईएनसी कार्यालय में किए जाने की तैयारी है। 

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पहले जारी हो चुके थे आरोप पत्र

जानकारी के अनुसार, सभी सात इंजीनियरों को पूर्व में आरोप पत्र जारी किए गए थे और उनसे जवाब मांगा गया था। डिजाइन से जुड़े अधिकारियों ने अपने जवाब में किसी प्रकार की गलती से इनकार किया। विभाग द्वारा जवाबों का परीक्षण करने के बाद अधिकांश अधिकारियों को बिना अतिरिक्त कार्रवाई के बहाल कर दिया गया। 

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इन अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई

मामले में  चीफ इंजीनियर संजय खांडे, चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा,  प्रभारी ईई शबाना रज्जाक, सहायक यंत्री शानुल सक्सेना, उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा, प्रभारी एसडीओ रवि शुक्ला, प्रभारी ईई जावेद शकील और सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री एमपी सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। आरोप था कि रेलवे की मंजूरी के बिना ड्राइंग अनुमोदन और डिजाइन से जुड़ी प्रक्रियाओं में गंभीर त्रुटियां हुईं।

 

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विभागीय जांच अभी जारी रहेगी

पीडब्ल्यूडी ने स्पष्ट किया है कि कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी। इसके लिए अलग से जांच अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो दस्तावेज, बयान और साक्ष्यों का परीक्षण करेगा। यह प्रक्रिया अगले चार से पांच महीने तक चल सकती है। बताया गया है कि तत्कालीन चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, एसडीओ रवि शुक्ला और उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा के मामलों में बहाली के साथ विभागीय जांच भी जारी रहेगी, जबकि अन्य अधिकारियों को फिलहाल राहत दे दी गई है। 

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ब्रिज का दोबारा हो रहा री-डिजाइन

भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में बने इस रेलवे ओवरब्रिज का तीखा मोड़ शुरुआत से विवादों में रहा है। विशेषज्ञों ने इसे यातायात के लिहाज से जोखिमभरा बताया था। अब पीडब्ल्यूडी और रेलवे मिलकर ब्रिज के टर्निंग हिस्से का दोबारा डिजाइन तैयार कर रहे हैं, हालांकि निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो पाया है। इससे क्षेत्र के हजारों लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि मामला सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से तकनीकी जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में ब्रिज पर 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से वाहन चलाने को खतरनाक बताया गया था।

 



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