बरगी डैम क्रूज हादसे के बाद एक बार फिर नियमों और अनुमति प्रक्रिया को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश में स्पष्ट है कि गैर-वेटलैंड जलाशयों में मोटर बोट संचालन की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी जा सकती है। जिन जल निकायों को वेटलैंड घोषित नहीं किया गया है, वहां यांत्रिक नाव संचालन संभव है, बशर्ते उनमें चार-स्ट्रोक इंजन लगे हों और सभी पर्यावरणीय कानूनों का पालन किया जाए। इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरणीय कानूनों के पालन का अर्थ है कि विभिन्न विभागों से अनुमति और क्लियरेंस लेने की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। इसके उलट मध्य प्रदेश पर्यटन निगम के सलाहकार पूर्व नौसेना कमांडर राजेंद्र निगम का कहना कि उन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
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क्या कहता है एनजीटी के आदेश का पैरा 131
प्रदेश की जिन झीलों/जल निकायों को वेटलैंड (आर्द्रभूमि) के रूप में घोषित नहीं किया गया है, उनमें नावों का संचालन किया जा सकता है, बशर्ते वे चार-स्ट्रोक आउटबोर्ड इंजन से सुसज्जित हों, जैसा कि दुनिया के तीन दर्जन से अधिक देशों में उपयोग किया जा रहा है और साथ ही पर्यावरण संबंधी कानूनों का पालन किया जाए।
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पर्यटन निगम का दावा-क्रूज अंतरराष्ट्र्रीय मानकों के अनुरूप
पूर्व कमांडर राजेंद्र निगम का कहना है कि प्रदेश में संचालित निगम के सभी क्रूज अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं, इंजन इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन सोसायटी से प्रमाणित हैं और चालक दल भी प्रशिक्षित है। उनका दावा है कि आवश्यक सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पालन किया गया है, इसलिए अलग से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति जरूरी नहीं है।
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यह है बड़ा सवाल
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि NGT के 2023 के आदेश में “पर्यावरण कानूनों का पालन” का मतलब मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल, वन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों से अनुमति लेना है। ऐसे में बिना स्पष्ट अनुमति के संचालन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974 और Environment (Protection) Act, 1986 के प्रावधान लागू होते हैं, जिनके तहत संबंधित एजेंसियों से अनुमति लेना जरूरी होता है।
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नर्मदा बांधों में क्रूज चलाना उचित नहीं
पर्यावरणविद अजय दुबे ने कहा कि नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों से जुड़े बांधों में एनजीटी की चेतावनियों के बावजूद क्रूज चलाना उचित नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आवश्यक अनुमति ली गई थी? क्रूज का बीमा वैध था या नहीं? और उसमें कितने यात्री बिना टिकट सवार थे? दुबे ने यह भी कहा कि शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जैसे संस्थान इस प्रकार के क्रूज संचालन को बढ़ावा नहीं देते, इसलिए पूरे मामले में नियमों और सुरक्षा मानकों की सख्त समीक्षा जरूरी है।
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अधिकारियों को जानकारी नहीं
इस मुद्दे पर जब जबलपुर स्थित क्षेत्रीय प्रदूषण मंडल कार्यालय के अधिकारी केपी सोनी से बात की गई, तो उन्होंने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि दस्तावेज देखने के बाद ही कुछ स्पष्ट कर पाएंगे।
