भारत में शूटिंग खेल के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। देशभर में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसे वैश्विक स्तर पर भुनाने के लिए सही बुनियादी ढांचे और मजबूत कोचिंग व्यवस्था की दरकार है। यह बातें ओलंपिक कोच और कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक विजेता रौनक पंडित ने इंदौर में कही। पंडित ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य इंदौर के स्कूलों में विकसित उत्कृष्ट सिस्टम का उपयोग कर खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करना है। पंडित इंदौर के चत्रभुज नरसी स्कूल में आयोजित पिस्टल शूटिंग प्रतियोगिता में आए और यहां उन्होंने भारतीय शूटिंग के भविष्य और खिलाड़ियों के मानसिक कौशल पर विस्तार से चर्चा की।
असफलता के डर से मुक्त होकर खेलों में जाएं
पंडित ने स्पष्ट किया कि एक निश्चित स्तर के बाद सभी खिलाड़ियों में समान प्रतिभा होती है, जहां कोच की भूमिका निर्णायक हो जाती है। कोच के पास तकनीकी समझ के साथ रणनीतिक सोच और ट्रेनिंग की सटीक योजना होना अनिवार्य है। चूंकि शूटिंग एक मानसिक खेल है, इसलिए इसमें शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक संतुलन का महत्व सबसे अधिक है। उन्होंने खिलाड़ियों को असफलता के डर से मुक्त होकर प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ रहा भारत का दबदबा
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के बढ़ते दबदबे का जिक्र करते हुए पंडित ने कहा कि देश कॉमनवेल्थ, एशियाई खेल और विश्व चैम्पियनशिप में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि व्यवस्था और प्रक्रियाओं में सुधार जारी रहा, तो भारत आने वाले लॉस एंजेलिस ओलंपिक में शूटिंग के क्षेत्र में 4 से 6 पदक जीत सकता है।
इंदौर के साथ पुराना रिश्ता
पंडित ने अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2001 में वे इंदौर से ही सीनियर नेशनल चैंपियन बने थे। उन्होंने संकल्प लिया कि वे इंदौर को न केवल स्वच्छता बल्कि शूटिंग के क्षेत्र में भी एक नई वैश्विक पहचान दिलाएंगे।
अनुशासन और चरित्र निर्माण पर जोर दिया
स्कूल के चेयरपर्सन सुजय जयराज और प्रिंसिपल डॉ. जेरिन जैकब ने भी शिक्षा के साथ-साथ खेलों के माध्यम से अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित ओपन हाउस सेशन में छात्रों और अभिभावकों को शूटिंग से मिलने वाली एकाग्रता और नियंत्रण के बारे में जानकारी दी गई।
