इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान वंदे मातरम के बहिष्कार का मामला अभी शांत नहीं हुआ है। इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए कांग्रेस ने एक समिति गठित की है। मंगलवार को प्रदेश पदाधिकारियों ने दोनों पार्षदों और कुछ कांग्रेस नेताओं को देवास बुलाकर मामले पर विस्तार से चर्चा की। पार्षदों के निलंबन का मामला फिलहाल पार्टी की अनुशासन समिति के विचाराधीन है।

मंगलवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव संजय दत्त और सह-प्रभारी उषा नायडू देवास पहुंचे। दोनों ही अनुशासन समिति के सदस्य हैं। उन्होंने पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम को चर्चा के लिए बुलाया। बैठक में के.के. मिश्रा सहित अन्य नेता भी मौजूद रहे।

बैठक के बाद रुबीना इकबाल खान ने कहा कि उन्हें वंदे मातरम गाने से कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उनका कहना था कि वे सदन में 20 मिनट देर से पहुंची थीं और उसके बाद उनसे राष्ट्रगीत गाने को कहा गया। उन्होंने संबंधित कानून का हवाला देते हुए कहा कि वंदे मातरम स्वेच्छा से गाया जाता है, इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।

 

रुबीना ने यह भी स्वीकार किया कि गुस्से में उनसे कुछ शब्द निकल गए थे, जिसके लिए उन्होंने खेद व्यक्त कर दिया है। इसके बाद संजय दत्त ने इंदौर से आए अन्य नेताओं से भी इस मामले में जानकारी ली।

यह विवाद अब थाने और अदालत तक पहुंच चुका है। इंदौर पुलिस ने दोनों पार्षदों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनके बयान भी लिए हैं। वहीं, हाईकोर्ट ने दोनों पार्षदों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार से भी जवाब मांगा है। इस मुद्दे पर भाजपा लगातार कांग्रेस पर हमलावर बनी हुई है और राजनीतिक तौर पर घेरने में कोई कसर बाक



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