इंदौर के रिहाइशी और अर्ध-शहरी इलाकों में जंगली जानवरों, विशेषकर तेंदुओं की सक्रियता ने स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ समय से महू से लेकर देवगुराड़िया तक के क्षेत्रों में तेंदुए की मौजूदगी के प्रमाण मिल रहे थे, जिससे जनता के बीच भारी भय का माहौल बना हुआ था। इस बीच वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है, जहां सनावदिया गांव में एक तेंदुए को पिंजरे में कैद कर लिया गया है।
वन विभाग की लंबी निगरानी के बाद पकड़ में आया
सनावदिया और देवगुराड़िया के आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए द्वारा मवेशियों पर हमला करने की खबरें लगातार प्राप्त हो रही थीं। वन विभाग ने इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए तेंदुए के मूवमेंट पर पैनी नजर रखी। शिकार के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद विभाग ने लगभग एक सप्ताह पहले इलाके में पिंजरा लगाया था। शनिवार, 31 जनवरी की सुबह जब टीम मौके पर पहुंची, तो तेंदुआ पिंजरे में फंसा हुआ मिला। अनुमान लगाया जा रहा है कि वह शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात को पिंजरे में दाखिल हुआ था।
स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिड़ियाघर भेजा गया
रेस्क्यू टीम का नेतृत्व कर रहे रालामंडल रेंजर योगेश यादव ने जानकारी दी कि पकड़े गए तेंदुए को तत्काल कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (इंदौर चिड़ियाघर) भेज दिया गया है। वहां विशेषज्ञों की देखरेख में उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। यह रेस्क्यू ऑपरेशन शनिवार सुबह करीब 7 बजे सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, हालांकि महू जैसे अन्य क्षेत्रों में अब भी खतरा बरकरार है।
सघन आबादी वाले क्षेत्र में बढ़ा खतरा
जिस क्षेत्र से तेंदुए को पकड़ा गया है, वह काफी घनी आबादी वाला इलाका है। सनावदिया और उसके आसपास के गांवों को मिलाकर करीब 25 हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। रेंजर योगेश यादव के अनुसार, यह क्षेत्र देवगुराड़िया और रालामंडल की पहाड़ियों से सटा हुआ है, जिसकी वजह से यहां जंगली जानवरों का आवागमन स्वाभाविक है। पिछले एक सप्ताह से जारी इस मिशन में वन विभाग के 8 से 9 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम दिन-रात तैनात रही।
