इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में सोमवार को करणी सेना द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने होलकर साइंस कॉलेज में सामने आए संभावित इंटर्नशिप घोटाले और इसमें विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट ऑफिसर की संदिग्ध भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। करणी सेना ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित करने की मांग की है। पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें समय रहते पूरी नहीं की गई, तो वे उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त को इस संबंध में औपचारिक ज्ञापन सौंपेंगे।

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने स्वायत्तता पर दी सफाई

प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि होलकर साइंस कॉलेज एक स्वायत्त संस्थान है। हालांकि, प्रबंधन ने यह स्वीकार किया है कि विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट ऑफिसर की भूमिका के संबंध में लगाए गए आरोपों की जांच करवाई जा सकती है। करणी सेना के पदाधिकारियों का दावा है कि होलकर साइंस कॉलेज में हाल ही में सामने आए इंटर्नशिप मामले में व्यापक अनियमितताएं हुई हैं और संभावित घोटाले के कई साक्ष्य भी उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा की गई है।

डीएवीवी में करणी सेना ने यह मांगें रखी

संगठन ने प्रशासन के समक्ष कई बिंदु रखे हैं। उन्होंने पूछा है कि किसी कॉलेज द्वारा एमओयू करने की अनुमति किस आधार पर दी गई और क्या इसके लिए विश्वविद्यालय से विधिवत स्वीकृति ली गई थी। संगठन का कहना है कि यदि स्वीकृति नहीं ली गई, तो यह विश्वविद्यालय के नाम का दुरुपयोग है। इसके अतिरिक्त यह भी आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट ऑफिसर अन्य सरकारी कॉलेजों में निजी कंपनी के माध्यम से कार्य कर रहे हैं। संगठन ने स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या वे इसके लिए अधिकृत हैं, अन्यथा यह पद का दुरुपयोग है। उन्होंने पूरे मामले के तार विश्वविद्यालय से जुड़े होने की आशंका जताते हुए स्वतंत्र जांच समिति की मांग की है।

निजी कंपनी और प्लेसमेंट अधिकारी के बीच साठगांठ के आरोप

श्री राजपूत करणी सेना छात्र संगठन इंदौर के छात्र संगठन मंत्री श्याम शुक्ला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि होलकर साइंस कॉलेज प्रशासन ने एक निजी व्यक्ति को आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से एमओयू साइन किया है। उन्होंने दावा किया कि जिस कंपनी के साथ यह समझौता हुआ है, वह विश्वविद्यालय के ही प्लेसमेंट अधिकारी के नाम पर दर्ज है। शुक्ला ने सवाल उठाया कि सरकारी पद पर आसीन व्यक्ति कैसे किसी सरकारी कॉलेज में अपनी प्राइवेट कंपनी चला सकता है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रबंधन ने प्लेसमेंट अधिकारी की भूमिका की जांच करने का आश्वासन दिया है।

तथ्यों की जांच के आधार पर होगी नियमानुसार कार्रवाई

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रज्वल खरे ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि होलकर साइंस कॉलेज में इंटर्नशिप और प्लेसमेंट ऑफिसर को लेकर कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन इन मांगों और आरोपों पर संज्ञान लेगा और यह देखा जाएगा कि इसमें क्या वैधानिक कार्रवाई संभव है। रजिस्ट्रार ने आश्वासन दिया है कि ज्ञापन में जो भी तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं, उनकी गहनता से जांच करवाई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।



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