इंदौर में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों का समापन आज एक सर्वसम्मत ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के साथ हुआ, जिसमें खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु-सहनीय खेती, कृषि व्यापार और डिजिटल एग्रीकल्चर को नई दिशा देने वाले कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वैश्विक संकट और अनिश्चितताओं के बीच ब्रिक्स देशों की यह बैठक पूरी दुनिया के लिए आशा, विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश लेकर आई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सदस्य और सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित कुल लगभग 100 प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कृषि और खाद्य सुरक्षा के प्रश्न पर ब्रिक्स देशों के बीच कितना गहरा जुड़ाव और गंभीरता है।
चार मुख्य प्राथमिकताएं: किसान, खाद्य सुरक्षा और जलवायु
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर गहन विमर्श हुआ- दुनिया और ब्रिक्स देशों की खाद्य सुरक्षा (फूड सिक्योरिटी) और पौष्टिक आहार, ब्रिक्स देशों के बीच कृषि व्यापार और सहयोग को बढ़ावा, जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच रीजेनेरेटिव फार्मिंग, जलवायु अनुकूल और सतत कृषि पद्धतियां, खाद्य प्रणालियों और कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीक और साझेदारी को मजबूत करना। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि भरपूर अनाज उपलब्ध हो, साथ ही पोषणयुक्त भोजन भी सभी तक पहुंचे और जो अन्नदाता किसान दुनिया को भोजन देता है, उसकी आजीविका सुरक्षित और बेहतर हो, इन्हीं सवालों को बैठक की सोच के केंद्र में रखा गया। चौहान ने कहा कि छोटे और सीमांत किसान, जिन्हें कई देशों में फैमिली फार्मर्स भी कहा जाता है, उन पर विशेष फोकस रखते हुए एक अलग सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उनकी कठिनाइयों, इनपुट्स की उपलब्धता, ऋण प्रवाह, उचित कीमत और बाजार से जुड़ाव पर विस्तार से चर्चा हुई।
‘इंदौर डिक्लेरेशन’: किसान-केंद्रित वैश्विक घोषणापत्र
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद जो संयुक्त घोषणा पत्र तैयार हुआ, उसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया और इंदौर में अपनाए जाने के कारण इसे ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि इस घोषणा पत्र का केंद्र किसान है- किसान को केंद्र में रखकर खाद्य सुरक्षा, पोषण, आजीविका, कृषि व्यापार, नवाचार, निवेश, क्लाइमेट रेज़िलिएंट खेती और सतत कृषि विकास को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता इस डिक्लेरेशन में दर्ज की गई है।
चार नई संस्थागत पहलें: नेटवर्क और फोरम
1. सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रो-इकोलॉजी एंड रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहली बड़ी पहल BRICS Network of Centres of Excellence on Agro-Ecology and Regenerative Agriculture की स्थापना है। उन्होंने कहा कि यह नेटवर्क प्राकृतिक, जैविक और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों पर संयुक्त रिसर्च, अनुभव-साझेदारी और क्षमता निर्माण का प्लेटफॉर्म बनेगा, जिसके माध्यम से सदस्य देश एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख सकेंगे और जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा दे सकेंगे। कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने जानकारी दी कि भारत में इस नेटवर्क के अंतर्गत प्राकृतिक खेती से जुड़े सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम (Indian Institute of Farming Systems Research) को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, जो संयुक्त रिसर्च, नॉलेज शेयरिंग और ट्रेनिंग में अहम योगदान देगा।
2. BRICS Network on Digital Agriculture
यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भू-स्थानिक तकनीक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित कृषि समाधानों के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देगा। यह नेटवर्क आधुनिक प्रौद्योगिकी और कृषि नवाचार के बीच एक सशक्त सेतु का काम करेगा, जिससे विकसित हो रही तकनीकों को अधिक मजबूत बनाकर सीधे किसानों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि इस नेटवर्क का समन्वय भारत में IIT, दिल्ली द्वारा किया जाएगा, जबकि सभी सदस्य देश इसमें शामिल होकर अपने अनुभव, इनोवेशन और नीतिगत पहल साझा करेंगे, ताकि डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में सामूहिक प्रगति सुनिश्चित हो सके।
3. Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems
तीसरी महत्वपूर्ण घोषणा Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems की स्थापना से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य किसानों के बीज संबंधी अधिकारों, देशी बीजों की विविधता और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि यह फोरम इस बात पर काम करेगा कि परंपरागत बीज विलुप्त न हों, उनकी उपलब्धता बनी रहे, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में उनकी भूमिका को पहचाना जाए और किसानों के पारंपरिक ज्ञान को भी सहेज कर रखा जाए।
4. BRICS AgriN – Agro Input, Genetic Resources and Information Network
चौथी बड़ी पहल BRICS AgriN (Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network) की स्थापना है, जो सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों, बीजों और अनुवांशिक संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करेगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि यह नेटवर्क सूचना आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देगा, ताकि अलग-अलग देशों में उपलब्ध श्रेष्ठ किस्में, जेनेटिक संसाधन और इनपुट्स की जानकारी साझा हो सके और व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकें।
इंदौर: वैश्विक कृषि कूटनीति का नया मंच
इंदौर की मेजबानी की विशेष प्रशंसा करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मालवा की परंपरा के अनुरूप यहां जिस आत्मीय आतिथ्य और सत्कार से प्रतिनिधियों का स्वागत हुआ, उससे सभी प्रसन्न हैं। 56 दुकान, राजवाड़ा और मांडू की सैर उनके मन में लंबे समय तक स्मृति के रूप में अंकित रहेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ आह्वान को आगे बढ़ाते हुए मेघदूत गार्डन में सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने वृक्षारोपण कर ‘ब्रिक्स वाटिका’ (वृक्षारोपण स्थल) की स्थापना की, इससे पहले यहां ग्लोबल पार्क और यूरो–रशियन पार्क भी स्थापित हो चुके हैं।
