राजधानी में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर तय दुकानों से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाए जाने की शिकायतों के बीच प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कई अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन अप्रत्यक्ष रूप से संकेत देते हैं कि पाठ्य सामग्री निर्धारित स्थान से ही ली जाए, जिससे बाजार में विकल्प होने के बावजूद मजबूरी में महंगी खरीदारी करनी पड़ती है।
स्कूल संचालको पर होगी सख्त कार्रवाई
स्थिति को गंभीर मानते हुए कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि किसी भी अशासकीय विद्यालय को अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से पुस्तक, यूनिफॉर्म या अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करने का अधिकार नहीं है। आदेश में कहा गया है कि यदि इस प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित विद्यालय के विरुद्ध मान्यता अधिनियम 2017 और नियम 2020 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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एसडीएम के नेतृत्व में जांच दल गठित
आदेश के तहत आठ अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) के निर्देशन में जांच दल गठित किए गए हैं। हर दल में संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार और शासकीय विद्यालयों के प्राचार्य सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। ये टीमें स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं का आकस्मिक निरीक्षण करेंगी, पुस्तकों के आईएसबीएन नंबरों की पुष्टि करेंगी और निजी विद्यालय फीस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार फीस वसूली की जानकारी भी एकत्र करेंगी। प्रतिदिन की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी।
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नियमों की अवहेलना पाए होगी दंडात्मक कार्रवाई
आदेश में यह भी उल्लेख है कि जांच तत्काल प्रभाव से लागू रहेगी और किसी भी स्तर पर नियमों की अवहेलना पाए जाने पर आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। शहर में शिक्षा की बढ़ती लागत के बीच यह कदम अभिभावकों को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच दल की कार्रवाई से जमीनी स्तर पर स्कूलों की कार्यप्रणाली में कितनी पारदर्शिता आती है।
