मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह का विरोध अनोखे और आक्रामक अंदाज में सामने आया। किसानों के मुद्दे को लेकर वे ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ विधानसभा की ओर रवाना हुए, लेकिन मंत्रालय के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान मौके पर काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।


पास को लेकर विवाद, पुलिस से तीखी नोकझोंक

अभिजीत शाह का कहना था कि उन्होंने ट्रैक्टर के लिए विधिवत पास बनवाया है और उन्हें रोका जाना गलत है। वहीं पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा कि ट्रैक्टर को विधानसभा क्षेत्र में ले जाने की अनुमति नहीं है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो कुछ देर में धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। मौके पर मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी जैसे हालात भी बने।

गेहूं लेकर पहुंचे सदन

ट्रैक्टर को बाहर ही रोक दिए जाने के बाद भी अभिजीत शाह पीछे नहीं हटे। वे गेहूं का गठ्ठा लेकर विधानसभा के अंदर पहुंचे और किसानों की स्थिति को प्रतीकात्मक तरीके से सामने रखा। सदन में उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश का किसान दिन-रात मेहनत कर रहा है, खून-पसीना एक कर रहा है, लेकिन उसे उसकी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा।

किसानों की हालत पर सरकार को घेरा

शाह ने आरोप लगाया कि किसानों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है और उन्हें उनकी उपज का सही मूल्य नहीं दिया जा रहा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अन्य राज्यों में गेहूं की खरीद ज्यादा दाम पर हो रही है, जबकि मध्य प्रदेश के किसान कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं।

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अधिकारियों को सख्त चेतावनी

विधायक ने प्रशासनिक अधिकारियों को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं। उन्होंने हाथ के इशारों के साथ स्पष्ट कहा कि अगर किसानों के हितों की अनदेखी की गई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे।

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भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर उठाए सवाल

अभिजीत शाह ने व्यवस्था में भ्रष्टाचार और काम में हो रही देरी पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि योजनाएं और वादे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीन पर किसानों को राहत नहीं मिल रही। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों से किए गए वादों को तुरंत पूरा किया जाए, गेहूं समेत अन्य फसलों का उचित समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जाए और किसानों को उनका हक बिना देरी के दिया जाए।



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