भोपाल गैस त्रासदी के सबसे गंभीर पीड़ित एक बार फिर सरकारी उदासीनता का शिकार हो गए हैं। केंद्र सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा समय पर बजट जारी नहीं किए जाने के कारण कैंसर और किडनी फेल्योर जैसी जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे 160 गैस पीड़ितों को नवंबर 2025 से अब तक उनकी अनुग्रह राशि नहीं मिल पाई है। इलाज के लिए दर-दर भटक रहे इन पीड़ितों के सामने जीवन और मृत्यु का संकट खड़ा हो गया है। गैस पीड़ित संगठन की रचना ढ़ींगरा ने बताया कि पीड़ितों की स्थिति इतनी गंभीर है कि कई मरीज नियमित डायलिसिस और महंगे कैंसर उपचार पर निर्भर हैं। ऐसे समय में 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि उनके लिए सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि जीवन रेखा साबित हो सकती है। बावजूद इसके, बजट के अभाव में सबसे ज्यादा बीमार और कमजोर गैस पीड़ितों को उनके अधिकार से वंचित रखा जा रहा है।

परिजन काट रहे चक्कर

गैस पीड़ितों के वेलफेयर कमिश्नर कार्यालय के पास भी यह बताने के लिए कोई ठोस टाइमलाइन नहीं है कि राशि कब तक जारी होगी। पीड़ित और उनके परिजन रोजाना दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।

इलाज महंगा, मदद शून्य

पीड़ित संगठनों का कहना है कि अधिकांश गैस पीड़ित बेहद गरीब तबके से आते हैं। इलाज के खर्च ने उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह तोड़ दी है। कई परिवार कर्ज में डूब चुके हैं, तो कुछ को इलाज बीच में ही छोड़ना पड़ रहा है। ऐसे में अनुग्रह राशि में देरी सीधे तौर पर पीड़ितों की जान के साथ खिलवाड़ है।

मंत्रालय को चिट्ठी, त्वरित कार्रवाई की मांग

इस गंभीर मुद्दे को लेकर गैस पीड़ित संगठनों ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल बजट जारी करने की मांग की है। संगठनों ने साफ कहा है कि यह मामला प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि मानवीय संकट बन चुका है, जिस पर तुरंत निर्णय लिया जाना जरूरी है।

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2010 में लिया गया था फैसला

गौरतलब है कि वर्ष 2010 में भोपाल गैस त्रासदी को लेकर गठित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने यह निर्णय लिया था कि कैंसर और किडनी फेल्योर से पीड़ित गैस पीड़ितों को 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। यह फैसला पीड़ितों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया था, लेकिन बजट अटकने के कारण आज भी कई पात्र पीड़ित इस सहायता से वंचित हैं।

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आंदोलन की चेतावनी

गैस पीड़ित संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बजट जारी कर अनुग्रह राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे और कानूनी विकल्पों पर भी विचार करेंगे। संगठनों का कहना है कि त्रासदी के 40 साल बाद भी अगर पीड़ितों को इलाज के लिए भीख मांगनी पड़े, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।



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