भोपाल के चर्चित गोकशी मामले में आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा की रिहाई के बाद विवाद फिर गहरा गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) निरस्त होने के बाद असलम के जेल से बाहर आने पर जय मां भवानी हिंदू संगठन ने प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन ने पूरे मामले को कमजोर जांच, देरी और लापरवाही का नतीजा बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। संगठन के अध्यक्ष भानू हिंदू ने आरोप लगाया कि मामले की शुरुआत से ही पुलिस और प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। उनका कहना है कि कंटेनर पकड़े जाने के बाद एफआईआर दर्ज करने में 10 दिन से ज्यादा समय लगा। जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण सैंपल खराब हो गया और पूरे मामले में केवल दो आरोपियों को ही चिन्हित किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोर्ट में कमजोर चार्जशीट पेश की गई, जिसका फायदा आरोपियों को मिला।
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दरअसल, 17 दिसंबर 2025 को नगर निगम के स्लॉटर हाउस से निकले एक कंटेनर में करीब 26 टन मांस पकड़ा गया था। मथुरा लैब की रिपोर्ट में गोमांस होने की पुष्टि के बाद 8 जनवरी को असलम चमड़ा और कंटेनर चालक मोहम्मद शोएब को गिरफ्तार किया गया था। 18 मार्च को अदालत से असलम को जमानत मिल गई थी, लेकिन जेल से बाहर निकलते ही गांधी नगर पुलिस ने उसे शांति भंग की आशंका में धारा 151 के तहत हिरासत में लेकर बाद में NSA लगा दिया था। हालांकि हाईकोर्ट की सलाहकार समिति ने NSA को उचित नहीं मानते हुए निरस्त कर दिया, जिसके बाद उसकी रिहाई हुई। अब जय मां भवानी संगठन ने चार्जशीट को हाईकोर्ट में चुनौती देने और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि गौवंश से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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