भोपाल के पुराने शहर स्थित काजीकैंप क्षेत्र से गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी मोहम्मद फराज उर्फ खालिद से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। पूछताछ के बाद एटीएस उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज चुकी है, जबकि उससे मिली जानकारियों का विश्लेषण जारी है।

एटीएस सूत्रों के अनुसार फराज उर्फ खालिद का संपर्क मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में सक्रिय रहे प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े कुछ लोगों से भी रहा है। जांच में यह भी सामने आया है कि वह प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के पुराने नेटवर्क से जुड़े लोगों के संपर्क में था और उनके जरिए नया मॉड्यूल खड़ा करने की योजना पर काम कर रहा था।

पूछताछ में फराज ने बताया कि उसकी पहचान सिमी से जुड़े रहे अरशद बिलग्रामी से थी। जिस अस्पताल में वह कार्यरत था, वहां अरशद का आना-जाना था और इसी दौरान दोनों के बीच संपर्क बना। फराज ने यह भी बताया कि पीएफआई से जुड़े वसीम अख्तर ने भोपाल के एक अन्य अस्पताल में उसके साथ काम किया था, जिसके बाद दोनों संपर्क में आए। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में देशविरोधी गतिविधियों के आरोपों के चलते पीएफआई पर पांच वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाया था।

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जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी अपने कॉल रिकॉर्ड और विभिन्न एप्लीकेशनों की चैट हिस्ट्री नियमित रूप से डिलीट कर देते थे। अब एटीएस तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से हटाए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास कर रही है, ताकि नेटवर्क और गतिविधियों से जुड़े अन्य सुराग जुटाए जा सकें। एटीएस सूत्रों का दावा है कि गिरफ्तार आरोपी एक ही पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे और उसके निर्देशों पर काम कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने और उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत होने के बाद ही हो सकेगी।

बता दें कि दो दिन पहले मध्य प्रदेश एटीएस ने पाकिस्तानी हैंडलर से कथित संपर्क रखने वाले मदरसा शिक्षक इजहार-उल-हक को बिहार के मधुबनी जिले से गिरफ्तार किया था। ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल लाकर उससे पूछताछ की गई। 22 जून को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार इजहार-उल-हक पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड खरीदकर उन्हें नेपाल के रास्ते पाकिस्तानी हैंडलरों तक पहुंचाने का आरोप है। एटीएस के मुताबिक उत्तर भारत में कथित तौर पर नया आतंकी मॉड्यूल तैयार करने के मामले में अब तक पांच राज्यों से छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की जांच जारी है।



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