शिवपुरी जिले के माधव टाइगर रिजर्व से एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंताजनक घटना सामने आई है। यहां मादा टाइगर MT-6 के हमले में एक आदिवासी ग्रामीण की दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने नरवर-शिवपुरी मार्ग पर चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।

जानकारी के अनुसार, ग्राम ऐरावन निवासी करीब 50 वर्षीय सरवन आदिवासी बीते दो दिनों से लापता थे। शुक्रवार शाम टाइगर ट्रैकिंग टीम को जंगल क्षेत्र में उनका शव बेहद क्षत-विक्षत हालत में मिला। घटनास्थल पर कपड़े, नहाने का सामान और अन्य वस्तुएं मिलने से अंदेशा है कि वह नदी में स्नान करने गए थे, तभी घात लगाए बैठे टाइगर ने उन पर हमला कर दिया।

शव की स्थिति अत्यंत भयावह थी। मृतक के शरीर के कुछ अंग ही मौके पर मिले, जबकि धड़ गायब था। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि किसी बड़े जंगली शिकारी ने तेज दांतों से हमला किया है। पास ही MT-6 की लोकेशन मिलने से बाघिन के हमले की आशंका और मजबूत हो गई है, हालांकि अंतिम पुष्टि विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने शनिवार सुबह करीब 7 बजे नरवर-शिवपुरी मार्ग पर जाम लगा दिया, जिससे लगभग पांच घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। सूचना मिलते ही पुलिस, वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। अंततः मुआवजे और सुरक्षा के ठोस आश्वासन के बाद दोपहर करीब 12 बजे जाम समाप्त हुआ।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मृतक के परिजनों को 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही राशि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। वहीं सतनबाड़ा पुलिस ने मामला दर्ज कर पोस्टमार्टम के बाद जांच शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि मादा टाइगर MT-6 को पिछले वर्ष दिसंबर में इस रिजर्व में छोड़ा गया था। तब से वह लगातार मानव बस्तियों के आसपास देखी जा रही है। जनवरी में उसने डोंगर गांव में एक व्यक्ति पर हमला कर उसे घायल किया था। इसके अलावा कई गांवों में मवेशियों का शिकार करने से ग्रामीणों में भय बना हुआ है।

वन विभाग ने अब तक उसे कई बार ट्रेंकुलाइज कर जंगल में छोड़ने का प्रयास किया, लेकिन हर बार वह आबादी की ओर लौट आती है। अप्रैल माह में भी उसने एक गांव में भैंस का शिकार किया था, जिससे स्पष्ट है कि उसकी गतिविधियां लगातार मानव क्षेत्र के करीब बनी हुई हैं।

इस ताजा घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या MT-6 आदमखोर होती जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वन्यजीव को सीधे तौर पर आदमखोर घोषित करना जल्दबाजी होगी, लेकिन लगातार घटनाएं चिंता जरूर बढ़ा रही हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोग जंगल या नदी की ओर जाने से बच रहे हैं।



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