गर्मी में कुत्तों की आक्रामकता बढ़ी, दो दिनों में 343 हमले, रेबीज खतरा बढ़ा, इलाज में लापरवाही जानलेवा साबित हो रही। …और पढ़ें

HighLights
- भीषण गर्मी में कुत्तों का व्यवहार आक्रामक होता जा रहा।
- दो दिनों में 343 लोग कुत्तों के हमले का शिकार।
- अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या बढ़ी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अप्रैल की तपती गर्मी अब इंसानों के साथ-साथ जानवरों के व्यवहार पर भी असर डाल रही है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते ही आवारा कुत्तों का स्वभाव आक्रामक होता जा रहा है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले दो दिनों में ही 343 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं।
इस बढ़ते खतरे के चलते जया आरोग्य अस्पताल (जेएएच), जिला अस्पताल और सिविल अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डाक्टरों का कहना है कि गर्मी के कारण कुत्तों में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, जिससे काटने की घटनाएं बढ़ती हैं।
गर्मी, प्यास और भूख बना रहे आक्रामक
जीआरएमसी के पीएसएम विभाग के डॉ अक्षत पाठक के अनुसार, कुत्तों में पसीने की ग्रंथियां नहीं होतीं, जिससे वे अपने शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते। गर्मी उन्हें शारीरिक रूप से थका देती है और उनका व्यवहार चिड़चिड़ा हो जाता है। पानी की कमी और भोजन न मिलने से भी वे बेचैन और आक्रामक हो जाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि मादा कुत्तों में हीट साइकल के दौरान हार्मोनल बदलाव भी आक्रामकता को बढ़ा सकता है।
आश्रय स्थल और नसबंदी पर जोर
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आवारा कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाने की प्रक्रिया चल रही है। नगर निगम की एमआइसी से प्रस्ताव पास हो चुका है और जल्द ही इसे परिषद में रखा जाएगा। वहीं निगम का दावा है कि कुत्तों की नसबंदी का काम भी लगातार जारी है।
अधूरा इलाज बन सकता है जानलेवा
डॉ अशोक मिश्रा पूर्व विभागाध्यक्ष, पीएसएम जीआरएमसी ने स्पष्ट किया है कि कुत्ता काटने के बाद लापरवाही बेहद खतरनाक हो सकती है। कई लोग एक-दो इंजेक्शन लगवाकर इलाज अधूरा छोड़ देते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। एंटी रैबीज का पूरा कोर्स करना अनिवार्य है। गंभीर घाव की स्थिति में इम्युनोग्लोबिन इंजेक्शन भी लगाया जाता है, जो वायरस को तुरंत निष्क्रिय करता है। शुक्रवार को हजार बिस्तर अस्पताल में डाग बाइट के 63 और जिला अस्पताल में 108 केस पहुंचे।
क्या करें, क्या न करें
- कुत्ता काटने पर तुरंत घाव को साबुन और पानी से धोएं।
- बिना देरी किए अस्पताल जाकर एंटी रेबीज लगवाएं।
- झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के चक्कर में न पड़ें, आवारा कुत्तों को उकसाएं नहीं, उनसे दूरी बनाए रखें l
- गर्मी में उनके लिए छायादार जगहों पर पानी की व्यवस्था करें।
- रेबीज का खतरा दो माह में छह मौतें बीते 2 महीने 19 दिनों में रेबीज से छह लोगों की मौत हो चुकी है।
इनमें ग्वालियर, टीकमगढ़, दतिया, छतरपुर और सबलगढ़ के मामले शामिल हैं। यह आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय हैं।
