दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या और स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां बगलामुखी की जयंती 24 अप्रैल यानी आज शुक्रवार को श्रद्धाभाव के साथ मनाई जाएगी। रामघाट से सीधे वड़नगर रोड स्थित दांडी आश्रम के सामने बने माता बगलामुखी धाम में यह आयोजन तपोनिधि संत स्वामी विजयानंद पुरी महाराज के सानिध्य में होगा।

स्वामी विजयानंद पुरी महाराज ने बताया कि वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी, 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार यानी आज धार्मिक नगरी उज्जैन में मां बगलामुखी का प्राकट्य उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। यह बाबा महाकाल की नगरी है, इसलिए आयोजन की सफलता के लिए बाबा महाकाल के दर्शन कर उन्हें निमंत्रण अर्पित किया गया है।

उन्होंने बताया कि इस उत्सव के मुख्य अतिथि के रूप में महाकाल मंदिर के महानिर्वाणी अखाड़े के गादीपति विनीत गिरी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। इस दिन पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग भी बन रहा है। इसी कारण मंदिर में 251 बटुकों द्वारा माता का विशेष पूजन-अर्चन किया जाएगा तथा शाबर मंत्रों के साथ महायज्ञ संपन्न होगा। मां बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए मंदिर की सजावट भी पीले रंग में की जाएगी और माता को पीले वस्त्र व पुष्प अर्पित किए जाएंगे। प्रयास रहेगा कि अर्पित की जाने वाली सभी सामग्री पीले रंग की ही हो। 

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पूजा से मिलती है विजय की प्राप्ति


मान्यता है कि इस दिन मां बगलामुखी की पूजा करने से शत्रु बाधाओं से मुक्ति मिलती है और जीवन में विजय प्राप्त होती है। विधि-विधान से पूजा, हवन और मंत्र जाप करने से नकारात्मक शक्तियों, तंत्र-मंत्र और बुरी नजर का प्रभाव समाप्त होता है। देवी की आराधना से आरोग्य में वृद्धि और शत्रुओं पर विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी


हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व है, जिनमें मां बगलामुखी को आठवीं महाविद्या माना जाता है। उन्हें शक्ति की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। यह पर्व वैशाख शुक्ल अष्टमी के दिन मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था। इस अवसर पर भक्त विशेष पूजा, अनुष्ठान और साधना कर माता को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।





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