नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। कलेक्ट्रेट की मुख्य इमारत के पीछे बनी टंकी पर मंगलवार दोपहर एक महिला पेट्रोल की बोतल लेकर चढ़ गई और आत्मदाह की धमकी देने लगी। पति व दो बच्चों की मौत से दुखी महिला की मांग थी कि उसे कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है, 20 लाख रुपये क्लेम के रूप में अभी चाहिए। वरना टंकी पर ही खुद पर पेट्रोल डालकर जान दे देगी, भले कलेक्टर को बुलाओ या एसपी को। सबसे पहले मौके पर पहुंचे एडीएम सीबी प्रसाद ने महिला से संवाद शुरू किया।
महिला काफी देर तक अड़ी रही और एडीएम के लिखित आश्वासन दिए जाने की बात पर सहमत होती दिखी। दो घंटे कलेक्ट्रेट में हाई वोल्टेज ड्रामा चला जिसके बाद पटवारी और महिला आरक्षक को एक-एक कर टंकी पर भेजा और जैसे-तैसे महिला के हाथ से बोतल नीचे गिराकर उसे सुरक्षित लाया गया।
मंगलवार को जनसुनवाई में भी महिला ने आवेदन दिया था जिसको लेकर अधिकारियों ने शहरी विकास अभिकरण व सीएमओ को जांच के लिए दिया था। दो घंटे बाद ही महिला टंकी पर चढ़ गई। तत्काल एडीएम ने पांच हजार की राशि प्रदान की और लिखित में नियमानुसार मदद का भरोसा दिया।
यह है पूरा मामला
भूरी बानो निवासी पिछोर, डबरा मंगलवार को कलेक्ट्रेट की जनुसनवाई में पहुंची थी, भूरी के पति सलमान शाह की चार साल पहले मौत हो चुकी और दो बच्चे भी नहीं रहे। भूरी के पांच बच्चे थे अब तीन बचे हैं और वह ठेला लगाती है।
जनसुनवाई में भूरी ने एडीएम सीबी प्रसाद को आवेदन दिया जिस पर शहरी विकास अभिकरण व पिछोर सीएमओ को जांच के लिए लिख दिया गया था। दो घंटे बाद ही भूरी टंकी पर चढ़ गई। भूरी ने बताया कि पति ट्रक चालक था जिसकी मौत पर कार्रवाई की मांग को बहोड़ापुर थाने गई थी, लेकिन महिला पुलिसकर्मी ने पीटकर भगा दिया। कलेक्ट्रेट परिसर में भूरी की मां व दो बच्चे भी मौजूद थे।
भूरी का आवेदन
मैं पूरी तरह टूट चुकी हूं, मरने के अलावा चारा नहीं मेरे पति की मृत्यु को चार साल हो गई है, मैंने आपके पास भी कई बार आवेदन दिया लेकिन मेरे पति का आज तक क्लेम नहीं मिला। मेरे पास छोटे-छोटे बच्चे हैं जिनका भरण पोषण करने के लिए हाथ ठेला लगाकर अपने बच्चों का पालन करती हूं। मेरे पास और कुछ नहीं है। मैं जब हाथ ठेला लगाने जाती हूं तो कुछ लोग मुझ पर गलत निगाह रखते हैं। अब मैं क्या करूं, मेरे पास अपने बच्चों को के साथ मरने के अलावा कोई चारा नहीं है, मुझे मेरे पति का क्लेम मुझे दिलाया जाए। ये मैं आपको आखिरी आवेदन देने आई हूं। मुझे क्लेम के 20 लाख रुपये दिलाए जाएं।
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दो घंटे, संवाद, चिल्ला-चिल्लाकर करना पड़ी बात
लगभग 60 फीट की ऊंचाई की टंकी पर भूरी से एडीएम को चिल्ला-चिल्लाकर बात करना पड़ी। भूरी की मां से भी आवाज लगवाई। भूरी के सामने एडीएम को कागज लेकर आश्वासन लिखना पड़ा, वह दिखाया नहीं उतरी। पुलिस भी पहुंची। तीन बजे लगभग चढ़ी भूरी को शाम पांच बजे उतारा गया फिर मेडिकल को भेजा। मौके पर एडीएम के अलावा एएसपी विदिता डागर, एसडीएम अतुल सिंह भी पहुंच गए थे। भूरी टंकी के नीचे बने कमरे की खिड़की जिसका पहले से कांच टूटा था वहां से अंदर घुसी थी।
