इंदौर में पदस्थ रहे पूर्व एसीपी राकेश गुप्ता के ग्वालियर कोर्ट के केस में इंदौर के पाँच पुलिसकर्मियों को गिरफ्तारी वारंट तामील करना महँगा साबित हुआ। पाँच पुलिसकर्मी स्कीम नंबर 114 में रहने वाले गौरव जैन के यहाँ दरवाज़ा तोड़कर घुसे।

वारंट तामील कर जैन को गिरफ्तार किया और निजी कार में ग्वालियर कोर्ट भी ले गए। आरोप है कि वकील से बात कराने के एवज में 25 हजार रुपये की रिश्वत भी ली। जैन ने इंदौर आकर पुलिस अधिकारियों से इस मामले में शिकायत की, तो अब थानेदार संजय विश्नोई, सिपाही प्रणीत भदौरिया, नीरज, रविंद्र और दीपेंद्र को निलंबित कर दिया गया।

परिवार के लोगों ने बंद कर लिया था दरवाज़ा

गौरव जैन और पूर्व एसीपी राकेश गुप्ता के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर विवाद है। जैन ने कुछ चेक दिए थे, जो बाउंस हो गए। इसके बाद गुप्ता ने ग्वालियर कोर्ट में केस दायर किया था। कोर्ट से जैन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था, जिसे गुप्ता ने पाँचों पुलिसकर्मियों को तामील कराने की जिम्मेदारी दी थी।

गुप्ता पूर्व में लसूड़िया में भी पदस्थ रहे हैं। जब पुलिसकर्मी वारंट तामील कराने जैन के घर गए, तो परिवार के लोगों ने गेट बंद कर लिया। पुलिसकर्मियों ने दरवाज़ा तोड़ा और जैन को पकड़कर ग्वालियर ले गए। रास्ते में जैन ने वकील से बात करने की इच्छा जताई, तो बदले में उससे भी रिश्वत ले ली। ग्वालियर से लौटने के बाद जैन ने सभी सबूतों के साथ पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह से शिकायत की। जाँच के बाद पाँचों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।



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