मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गैस सिलिंडर की किल्लत के बीच अब एक नया घोटाला सामने आ रहा है। सिलिंडरों से गैस चोरी, कम वजन में सप्लाई और ब्लैक में बिक्री जैसे मामलों ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात यह हैं कि लोगों को पूरा भुगतान करने के बावजूद पूरा गैस नहीं मिल रहा। हाल ही में करीब 350 सिलिंडरों की जांच में बड़ा खुलासा हुआ, जिसमें 40 सिलिंडरों में 2 किलो तक गैस कम पाई गई। यह सिर्फ एक जांच का मामला है, जबकि शहरभर से इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

सील पैक का बहाना, अंदर से गैस गायब

ग्राउंड पर की गई पड़ताल में उपभोक्ताओं ने बताया कि डिलीवरी के दौरान सिलिंडर का वजन नहीं कराया जाता। जब वे विरोध करते हैं, तो एजेंसी की तरफ से सीधा जवाब मिलता है सील पैक है गड़बड़ी नहीं हो सकती। लेकिन हकीकत इससे उलट है। एक उपभोक्ता ने बताया कि जब उन्होंने खुद से सिलिंडर तौलवाया तो उसमें गैस कम निकली, जिसके बाद एजेंसी को दूसरा सिलिंडर देना पड़ा।

नियम हैं, लेकिन पालन नहीं

खाद्य विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि उपभोक्ता चाहे तो सिलिंडर का वजन मौके पर ही कराया जाना चाहिए और एजेंसी इसके लिए बाध्य है। इसके बावजूद ज्यादातर मामलों में यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित है। इधर भोपाल कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम और तहसीलदारों की टीम बनाकर जांच के निर्देश दिए हैं। हर अधिकारी को अपने-अपने क्षेत्र में गैस एजेंसियों की जांच करनी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कार्रवाई नाम मात्र की ही नजर आ रही है। कहीं-कहीं खाद्य विभाग की इक्का-दुक्का कार्रवाई जरूर दिखती है, लेकिन व्यापक स्तर पर कोई ठोस अभियान नहीं चल रहा, जिससे गड़बड़ी करने वालों के हौसले बुलंद हैं।

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ब्लैक मार्केटिंग और फर्जी डिलीवरी भी उजागर

मामला सिर्फ कम गैस तक सीमित नहीं है। शहर में ब्लैक में सिलिंडर बेचने और फर्जी डिलीवरी के भी केस सामने आए हैं। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उनके मोबाइल पर सिलिंडर डिलीवरी का मैसेज आता है, लेकिन सिलिंडर उन्हें मिलता ही नहीं यानी डिलीवरी कहीं और कर दी जाती है।

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10 से ज्यादा एफआईआर दर्ज

प्रदेश में अब तक 10 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि 350 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं। खाद्य विभाग का कहना है कि लगातार कार्रवाई की जा रही है और जांच जारी है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि गैस सिलिंडर की कोई कमी नहीं है, इसलिए यह समस्या सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है। पदेशभर में ऐसे मामलों को लेकर करीब 10 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और 350 से ज्यादा शिकायतें सामने आ चुकी हैं।



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