प्रदेश में युवाओं को प्रशिक्षण के बाद सीधे रोजगार से जोड़ने के लिए अब नए रोजगारोन्मुखी कोर्स तैयार किए जाएंगे। भोपाल स्थित संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क को यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग की समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कौशल प्रशिक्षण तभी सार्थक है, जब उससे युवाओं को तुरंत रोजगार मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर चल रही प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन देश में बेहतर है। उन्होंने अधिक से अधिक युवाओं को इस योजना से जोड़ने और प्रशिक्षण के दायरे को बढ़ाने पर जोर दिया।

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बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय स्तर पर जारी आईटीआई ग्रेडिंग में मध्यप्रदेश पांचवें स्थान पर रहा है। प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग मिली है, जो बेहतर गुणवत्ता का संकेत है। साथ ही प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देशभर में सबसे अधिक नामांकन भी मध्यप्रदेश में दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री ने ‘सीखो-कमाओ योजना’ के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान उपलब्धि को दोगुना करने की दिशा में काम किया जाए। इसके साथ ही डेयरी, कृषि और अन्य क्षेत्रों से युवाओं को जोड़कर रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर भी जोर दिया गया।

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समीक्षा के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश में बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जोड़ा गया है। ‘युवा संगम’ कार्यक्रम के तहत लाखों आवेदकों को लाभ मिला है, वहीं एक लाख से अधिक युवाओं ने स्वरोजगार शुरू किया है। भोपाल स्थित संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में भी इस वर्ष हजारों युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में वर्तमान में 290 शासकीय और 644 निजी आईटीआई संचालित हैं। शासकीय आईटीआई में सीटों की संख्या बढ़ाकर 52 हजार से अधिक कर दी गई है, जिससे अधिक युवाओं को प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास के साथ उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देना जरूरी है, ताकि युवाओं को बेहतर रोजगार मिल सके और प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिले। 

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