न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
Published by: सतना ब्यूरो

Updated Fri, 10 Apr 2026 03:24 PM IST

चित्रकूट में हुए सर्वेक्षण के दौरान 500 से अधिक प्राचीन पांडुलिपियां मिली हैं, जिनका अध्ययन तुलसी शोध संस्थान में जारी है। इनमें देवनागरी, संस्कृत और उर्दू में लिखित दुर्लभ ग्रंथ शामिल हैं, जो भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की अनूठी झलक पेश करते हैं। ये पांडुलिपियां खास क्यों है चलिए जानते हैं।


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पांडुलिपियां।
– फोटो : अमर उजाला



विस्तार

मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगरी चित्रकूट में किए गए सर्वेक्षण के दौरान 500 से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान की गई है। इन पांडुलिपियों का अध्ययन वर्तमान में तुलसी शोध संस्थान में किया जा रहा है। यह खोज भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


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देवनागरी, संस्कृत और उर्दू में मिली पांडुलिपियां

इस सर्वेक्षण में मिली पांडुलिपियों की खास बात यह है कि ये विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखी गई हैं। अधिकांश पांडुलिपियां देवनागरी और संस्कृत में हैं, जबकि कुछ दुर्लभ पांडुलिपियां उर्दू भाषा में भी प्राप्त हुई हैं यह विविधता भारतीय समाज में भाषाई और सांस्कृतिक समन्वय की गहरी परंपरा को दर्शाती है।

 



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