उन्होंने कहा कि भस्म आरती का अनुभव शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। “अंदर का माहौल ऐसा था कि पता ही नहीं चला दो घंटे कैसे बीत गए। मैं बहुत करीब से बाबा महाकाल को देख सकी, शिवलिंग का श्रृंगार होते हुए देखा और जल अर्पित होते हुए भी देखा। यह कोई सामान्य अनुभव नहीं है।” उन्होंने कहा कि हर शिव भक्त को इस अनुभव को जरूर महसूस करना चाहिए और महाकाल धाम आना चाहिए।
भावुक हुईं, रोंगटे खड़े हो गए
उल्का गुप्ता ने बताया कि भस्म आरती के दौरान उनके अंदर एक अलग ही ऊर्जा थी, जिसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “इस दौरान मुझे रोना भी आया और मेरे रोंगटे भी खड़े हो गए। जिस तरह की प्रचंड आरती और तालियों की गूंज थी, वह बहुत ही अद्भुत और आश्चर्यचकित करने वाला अनुभव था।” उन्होंने सभी शिव भक्तों से अपील की कि वे भी महाकाल धाम आकर इस दिव्य अनुभव का हिस्सा बनें।
2013 के मुकाबले अब बेहतर व्यवस्थाएं
उल्का गुप्ता ने बताया कि वह इससे पहले वर्ष 2013 में भी महाकाल के दर्शन करने आई थीं। उन्होंने कहा कि उस समय की व्यवस्थाएं अलग थीं, लेकिन अब वर्ष 2026 में काफी बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि अब व्यवस्था बहुत ही व्यवस्थित हो गई है, कानून व्यवस्था सख्त है और सुरक्षा प्रबंधन भी मजबूत है।
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भीड़ होने के बावजूद डर नहीं लगता क्योंकि लाइन और सुरक्षा व्यवस्था बहुत बेहतर है। उन्होंने कहा कि हर कोने से शिवलिंग के दर्शन संभव हैं, जिससे भक्तों के लिए यह स्थान और अधिक सुविधाजनक और सहज बन गया है। उन्होंने महाकाल मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए “हर हर महादेव, जय महाकाल” का जयघोष किया।
300 लड़कियों को पछाड़कर बनी थीं झांसी की रानी
उल्का गुप्ता ने अपने करियर के बारे में बताते हुए कहा कि शुरुआती दिनों में ऑडिशन देना काफी मुश्किल होता था। उन्होंने कई ऑडिशन दिए, जिसके बाद उन्हें झांसी की रानी का किरदार मिला। उन्होंने बताया कि 200 से 300 लड़कियों में से उनका चयन हुआ था।
उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें जमीन से जोड़े रखा। उल्का हिंदी के साथ तेलुगु, बंगाली और मराठी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि अभिनय के प्रति उनका लगाव ही उन्हें अलग-अलग भाषाओं में काम करने के लिए प्रेरित करता है और वह खुद सात भाषाएं बोल सकती हैं।
उन्होंने कहा कि अभिनय उनके खून में है क्योंकि उनका जन्म एक कलाकार परिवार में हुआ है। उनके पिता गगन गुप्ता भी एक अभिनेता हैं, जो 15 साल की उम्र में बिहार छोड़कर मुंबई आए थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने घर पर ही उन्हें और उनके भाई-बहनों को थिएटर की शिक्षा दी।
‘सात फेरे’ से मिली पहचान
उल्का गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जेडी मजेठिया के धारावाहिक रेशमडंक से की थी। उस समय बाल कलाकारों को सीमित अवसर मिलते थे और उन्होंने कई छोटे-छोटे रोल किए। इसके बाद उन्हें धारावाहिक ‘सात फेरे’ में सलोनी की बेटी का किरदार निभाने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि इस कहानी ने उन्हें काफी प्रेरित किया, क्योंकि इसमें पहली बार उन्होंने एक सांवली मुख्य अभिनेत्री को देखा और शो में रंगभेद के खिलाफ संदेश दिया गया था।
