नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। श्रीमंत माधवराव सिंधिया शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय, ग्वालियर में चार साल पहले हुई कंप्यूटर लैब की गड़बड़ी का मामला विधानसभा तक पहुंच गया है। इसको लेकर विधायक कांग्रेस हेमंत कटारे की ओर से प्रश्न लगाया गया है। इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग बिंदु उठाते हुए प्रश्न लगाया गया है।

इस मामले में जो प्रश्न को लेकर जवाब की जानकारी कॉलेज से भेजी गई है, वह पूरी नहीं भेजी गई और गलत भी है। इसको लेकर उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी की ओर से पत्र भी जारी किया गया है।

बता दें कि विश्व बैंक परियोजना से 40 कंप्यूटर की एक प्रयोगशाला चार वर्ष पूर्व 2022 में बनाई गई। जिसकी कुल लागत 70 लाख रुपये आई थी। इस प्रयोगशाला को प्रभारी प्राचार्य डॉ. सरिता श्रीवास्तव ने रसायन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. डी. कुमार को आवंटित किया था। जबकि रसायन शास्त्र विभाग के पाठ्यक्रम में कोई भी विषय कंप्यूटर का नहीं था।

प्रयोगशाला चार वर्ष से बंद है

डॉ. डी. कुमार ने चार वर्ष में कभी भी इस प्रयोगशाला को नहीं खोला और आज भी यह प्रयोगशाला चार वर्ष से बंद है। इसमें लगे कंप्यूटरों की गारंटी बिना उपयोग किए ही समाप्त हो चुकी है। डॉ. डी. कुमार का स्थानांतरण आगर मालवा सात माह पूर्व किया जा चुका है। उच्च न्यायालय ने डी. कुमार पर गलत दस्तावेज पेश करने पर 5000 की कॉस्ट भी लगाई।

बताया गया कि महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ. सरिता श्रीवास्तव ने बिना डी. कुमार के चार्ज दिए उन्हें नो ड्यूज भी जारी कर दिया है। जिससे अब इस कंप्यूटर प्रयोगशाला का खुलना संभव नहीं है। इस प्रयोगशाला के कंप्यूटर ऑर्डर के अनुसार नहीं आए थे। इस कारण इस प्रयोगशाला को कंप्यूटर विभाग के स्थान पर रसायन विभाग के डॉ. डी. कुमार को आवंटित किया गया था।

जवाब में स्पष्ट उल्लेख नहीं

ओएसडी राज्य परियोजना संचालनालय की ओर से जारी पत्र में अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा ग्वालियर-चंबल संभाग को लिखा है कि प्रश्न क्रमांक 2384 में आपके द्वारा पूर्व प्रेषित जानकारी में निम्नलिखित बिंदुओं का उल्लेख नहीं किया गया है।

विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, उच्च शिक्षा मंत्रालय के द्वारा निम्न बिंदुओं की जानकारी मय दस्तावेजों सहित प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया है। प्रेषित उत्तर में एलपीसी एवं नो ड्यूज किया गया है अथवा नहीं, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। डॉ. डी. कुमार पर अभी महाविद्यालय का कितना ड्यूज बकाया है, इसकी जानकारी भी पूरक जानकारी में मंगाई जाना प्रस्तावित है।

न्यायालय द्वारा इन पर पांच हजार का आर्थिक दंड लगाया गया है। उक्त राशि जमा की गई अथवा नहीं, इसकी जानकारी भी मंगाई गई है।

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