Gwalior News: नगर निगम की कार्यशाला के अफसर डीजल खपत के मामले में दो तरह के नियम लागू कर रहे हैं। पिछले दिनों निगमायुक्त संघ प्रिय ने विभागीय कार्यों …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 15 Feb 2026 08:23:03 AM (IST)Updated Date: Sun, 15 Feb 2026 08:27:26 AM (IST)

अफसरों का कारनामा, निगम के दूसरे विभागों को दिए नोटिस, निजी वाहनों की डीजल खपत छुपाई

HighLights

  1. प्राइवेट वाहनों को दिए जा रहे, जानकारी छुपा ली है
  2. डंपरों को 1500 लीटर तक डीजल दिया जा रहा
  3. निगरानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। नगर निगम की कार्यशाला के अफसर डीजल खपत के मामले में दो तरह के नियम लागू कर रहे हैं। पिछले दिनों निगमायुक्त संघ प्रिय ने विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए कार्यशाला के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वाहनों की डीजल खपत कम की जाए और जो वाहन ज्यादा खपत कर रहे हैं, उनकी जानकारी जुटाकर कार्रवाई की जाए।

ऐसे में अधिकारियों ने मदाखलत, पार्क, जनकार्य, जनकल्याण विभाग के वाहनों द्वारा 200 लीटर मासिक डीजल की खपत करने पर ही ज्यादा खपत करने के आरोप लगाते हुए चालकों को सेवा समाप्ति तक के नोटिस जारी करा दिए, लेकिन डिपो के अंतर्गत आने वाले स्वयं के वाहनों के साथ ही प्राइवेट वाहनों को दिए जा रहे अंधाधुंध डीजल की जानकारी छुपा ली है।

1500 लीटर तक डीजल दिया जा रहा

इन प्राइवेट ट्रैक्टर-ट्रालियों को हर महीने 400 और डंपरों को 1500 लीटर तक डीजल दिया जा रहा है, जबकि ये वाहन सिर्फ सीमित इलाके यानी एक वार्ड या जोन में ही काम करते हैं। सेकंडरी वेस्ट संग्रहण के लिए लगे इन वाहनों को सिर्फ कचरा ठिए से उठाकर उन्हें संबंधित विधानसभा क्षेत्र के कचरा ट्रांसफर स्टेशन तक जाना होता है।

इसके बावजूद इन वाहनों में से ट्रैक्टर-ट्राली को प्रतिदिन 13 से 14 लीटर और डंपरों को 50 से 55 लीटर तक डीजल दिया जाता है। इन वाहनों में ही हर दिन डीजल की ज्यादा खपत होती है। इसके बावजूद इन वाहनों को किराये पर देने वाली एजेंसी तिवारी ट्रैवल्स का पूरा बचाव कार्यशाला के अधिकारी कर रहे हैं।

ज्यादा डीजल खपत को सही ठहराया जा रहा

स्वच्छता के नाम पर इन वाहनों की ज्यादा डीजल खपत को सही ठहराया जा रहा है। वहीं जिन विभागों के वाहन पूरे शहर में घूमकर काम करते हैं और आवागमन में कई किमी का सफर करते हैं, उनकी खपत ज्यादा बताकर नोटिस दिए जा रहे हैं।

किराये की गाड़ियों 
के जीपीएस भी बंद

इस मामले में विशेष बात यह है कि किराये के वाहन कितना और किस रूट पर चलें, इसकी निगरानी के लिए लगाई गई जीपीएस डिवाइस भी बंद पड़ी हैं।

इसका उल्लेख प्रतिदिन की मॉनिटरिंग रिपोर्ट में भी किया जाता है कि वाहनों के जीपीएस इनएक्टिव यानी बंद पड़े हुए हैं। इसके बावजूद इन वाहनों को मनमर्जी से डीजल वितरित किया जा रहा है।

निगरानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं

इनकी निगरानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। इसी का नतीजा है कि प्रतिदिन डीजल मिलने के बावजूद शहर में कचरा ठिए पड़े नजर आते हैं। इसके बावजूद कार्यशाला के अधिकारी दूसरे विभागों को नोटिस देकर इतिश्री कर रहे हैं।

पूरा प्रयास है कि निगरानी कर सभी वाहनों की वास्तविक लागत अनुसार ही डीजल प्रदान किया जाएगा। प्राइवेट वाहनों की भी निगरानी की जाएगी और उनके द्वारा लिया गया डीजल व रीडिंग का मिलान कर जरूरी एक्शन लिया जाएगा। -संघ प्रिय, आयुक्त, नगर निगम।



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