उज्जैन स्थित शनि नवग्रह मंदिर मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इस वर्ष एक दुर्लभ खगोलीय एवं आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनेगा। यहां सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन समाज को पिता-पुत्र संबंधों में मधुरता, सम्मान और संवाद का संदेश देगा।

जानें क्या है स्कंद पुराण में वर्णित इस मंदिर की विशिष्टता


स्कंद पुराण में वर्णित शनि नवग्रह मंदिर अपनी अद्वितीय संरचना के लिए जाना जाता है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां नवग्रहों के भूगर्भीय गर्भगृह एक-दूसरे से पूर्णतः पृथक एवं स्वतंत्र हैं। प्रत्येक ग्रह अपने अलग भूमिगत गर्भगृह में प्रतिष्ठित है। इसी विशेषता के कारण यहां सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि साक्षात् ईकरण के रूप में संपन्न किया जाता है।

14 जनवरी को होगा विशेष आयोजन


यह आयोजन 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को शनि नवग्रह मंदिर, त्रिवेणी, उज्जैन में आयोजित होगा। सूर्य देव को पालकी में विराजमान कर उनके भूमिगत गर्भगृह से डमरु-ढोल की गूंज के साथ त्रिवेणी नदी तक ले जाया जाएगा। इस दिव्य सवारी में 111 बटुक ब्राह्मण विभिन्न ग्रहों की ध्वजाएं धारण कर शामिल होंगे और मार्ग में सामूहिक रूप से आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करेंगे। त्रिवेणी नदी पर आचमन एवं विधिवत पूजन के उपरांत सूर्य देव पुनः शनि नवग्रह मंदिर लौटेंगे।

सायं 3:13 बजे होगा सूर्य का मकर प्रवेश


खगोलीय गणना के अनुसार सायं 3 बजकर 13 मिनट पर सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश होगा। इसी शुभ क्षण में सूर्य देव को शनि नवग्रह मंदिर के भूमिगत गर्भगृह में मकर राशि में साक्षात् ईकरण के रूप में विराजित किया जाएगा। इस दौरान सूर्य एवं शनि की शिखर ध्वजाओं का दिव्य मिलन होगा, जिसे पिता-पुत्र एकता, संतुलन और पारिवारिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है।

नवम वर्ष में प्रवेश कर रही है सूर्य देव की सवारी


कार्यक्रम के आयोजक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु कृष्णा  मिश्रा ने बताया कि सूर्य देव की यह सवारी इस वर्ष अपने नवम वर्ष में प्रवेश कर रही है। सूर्य (पिता) और शनि (पुत्र) के पारस्परिक संबंधों के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया जाएगा कि मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन रिश्तों में कटुता नहीं होनी चाहिए। सूर्य देव का गुड़ और शनि देव का तिल जीवन में मिठास, संयम और संतुलन का प्रतीक हैं।

कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियां


सूर्य देव की पालकी यात्रा


समय: दोपहर 2:45 बजे

सूर्य देव का मकर राशि में साक्षात् ईकरण


समय: सायं 3:13 बजे


 सूर्य-शनि शिखर ध्वजा मिलन

पौधारोपण संस्कार


कोणार्क सूर्य मंदिर से लाई गई अर्क मिट्टी से


शनि देव हेतु शमी पौधा


सूर्य देव हेतु मदार पौधा

पिता-पुत्र पाद पूजन


 समय: दोपहर 3:30 बजे

विशेष यज्ञ एवं मंत्रोच्चार


सूर्य एवं शनि मंत्रों के साथ


फरियाली खिचड़ी प्रसादी वितरण

समय: सायं 4:00 बजे


(एकादशी व्रत के कारण)

यह है सामाजिक संदेश


कृष्णा मिश्रा ने बताया कि मकर संक्रांति केवल दान और उपासना का पर्व नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में समय, समझ और संवाद का दान करने का पर्व है। यह आयोजन समाज को यह संदेश देता है कि धन से अधिक मूल्यवान पारिवारिक संबंधों में दिया गया समय है।



 



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