भागीरथपुरा में एक हजार से अधिक लोग दूषित पेयजल के कारण बीमार हुए है और अब तक सत्रह लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने पहले भागीरथपुरा क्षेत्र को महामारी ग्रस्त घोषित किया। फिर इसे प्रकोप माना।

 

स्वास्थ्य विभाग ने बस्ती को प्रकोप से मुक्त करने के लिए 200 टीमें मैदान में उतारी है, जो अलग-अलग टेस्ट करेगी और बस्ती में डायरिया के मरीजों की संख्या शून्य करेगी, अभी भी बस्ती से नए मरीजों के आने का सिलसिला जारी है। सरकारी रिकार्ड में तो ज्यादातर रोगियों को डायरिया ग्रस्त माना जा रहा है, लेकिन बस्ती में कुछ मरीज हैजे के भी मिले है। गंदे पानी ने कई पीडि़तों के किडनी और लीवर को भी खराब किया है।

 

हिन्दू सम्मेलन निरस्त

भागीरथपुरा में बीमारी से हुई मौतों के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भागीरथपुरा और  आसपास की तीन बस्तियों में हिन्दू सम्मेलन निरस्त कर दिया है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता इस विषम परिस्थित में पीड़ित परिवारों के साथ संपूर्ण संवेदना के साथ खड़े है और सेवा व सहायता प्रदान कर रहे हैं।

भागीरथपुरा क्षेत्र की तीन बस्तियों में स्थानीय समाज व संगठनों द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर हिन्दू सम्मेलन आयोजित करने की योजना थी।जिसे वर्तमान हालातों के कारण निरस्त किया गया है।

 

हाईकोर्ट में सुनवाई आज

भागीरथपुरा मामले में हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी। इस मामले में दो याचिकाएं लगी है। पहली सुनवाई में कोर्ट ने निगमायुक्त और अपर  आयुक्त को शोकाज नोटिस जारी किए थे। कोर्ट के समक्ष नगर निगम ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। उसमें बताया गया था कि मरीजों का इलाज जारी है और टैंकरों से बस्ती में जलप्रदाय किया जा रहा है।



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