मध्यप्रदेश में अपराध न्याय प्रणाली को तकनीक के जरिए अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव एस. कलगांवकर ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) 2.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली पहले से अधिक तेज, स्मार्ट और प्रभावी बनेगी। वे रविवार को भोपाल में आयोजित इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) क्रियान्वयन एवं डिजिटल एकीकरण पर राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

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सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

कार्यशाला में पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक विज्ञान और स्वास्थ्य विभाग सहित आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े सभी प्रमुख विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान डिजिटल एकीकरण से जुड़ी चुनौतियों, अनुभवों और व्यावहारिक समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।

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डिजिटल चार्जशीट और सुरक्षित डेटा प्रबंधन की जरूरत

न्यायमूर्ति कलगांवकर ने कहा कि अपराधी लगातार नई तकनीकों का दुरुपयोग कर रहे हैं, इसलिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपनाना होगा। उन्होंने ई-कोर्ट, ई-पेमेंट, ऑनलाइन न्यायिक सेवाओं और भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण जैसी पहलों की सराहना करते हुए डिजिटल चार्जशीट, सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों की व्यवस्थित इंडेक्सिंग और विभिन्न विभागों के बीच निर्बाध डेटा साझा करने की आवश्यकता पर बल दिया। 

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साइबर और संगठित अपराध से निपटने में तकनीक अहम

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि साइबर अपराध, संगठित अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तकनीक आधारित पुलिसिंग और आईसीजेएस अब समय की आवश्यकता बन चुके हैं।

‘वन कंट्री, वन डेटा, वन एंट्री’ पर फोकस

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के उपनिदेशक प्रसून गुप्ता ने बताया कि इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम और सीसीटीएनएस के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि ‘वन कंट्री, वन डेटा, वन एंट्री’ की अवधारणा के तहत आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े सभी विभागों के बीच निर्बाध डिजिटल समन्वय स्थापित करना एनसीआरबी का प्रमुख उद्देश्य है।

आईसीजेएस रोडमैप 2026-27 किया गया प्रस्तुत

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में आईसीजेएस रोडमैप 2026-27 प्रस्तुत किया गया। वहीं इंदौर पुलिस कमिश्नरेट, देवास और रतलाम की पुलिस टीमों ने डिजिटल एकीकरण से जुड़े अपने नवाचार, सफल प्रयोग और व्यावहारिक अनुभव भी साझा किए।



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