सर्वे दल ने वर्ष 1800 से 1947 के मध्य की हस्तलिखित पांडुलिपियों व ग्रंथों का अवलोकन किया।

HighLights
- ग्वालियर में मिला इतिहास का अनमोल खजाना
- ज्ञान भारतम ऐप पर डिजिटल संरक्षण
- प्रथम विश्व युद्ध के शहीदों का स्वर्ण इतिहास
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जिले में प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण के उद्देश्य से पांडुलिपि सर्वे का कार्य जारी है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देशन में सर्वे दल द्वारा विभिन्न स्थानों पर संरक्षित दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों का चिन्हांकन कर उन्हें डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है।
इसी क्रम में सर्वे दल ने बीते दिनों चेतकपुरी स्थित नीलकमल माहेश्वरी के निवास पर पहुंचकर वर्ष 1800 से 1947 के मध्य की हस्तलिखित पांडुलिपियों एवं ग्रंथों का अवलोकन किया। इस दौरान उपलब्ध सामग्री का विवरण ज्ञान भारतम ऐप पर दर्ज किया गया। नीलकमल के निजी संग्रह में सुरक्षित लगभग 700 दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया गया। उन्होंने बताया कि उनके संग्रह में कई अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित हैं।
इनमें सबसे छोटी आकार (माचिस के आकार की) हस्तलिखित पांडुलिपि भी शामिल है। साथ ही प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के नाम स्वर्ण (गोल्डन) स्याही से अंकित एक विशेष हस्तलिखित पांडुलिपि भी उनके संग्रह की महत्वपूर्ण धरोहर है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि यदि किसी के पास प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां, ग्रंथ अथवा अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित हैं, तो उनकी जानकारी पांडुलिपि सर्वे दल को उपलब्ध कराएं।
