इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य बीमा के मामले में प्रदेश के ग्रामीण इलाकों ने शहरी क्षेत्रों को काफी पीछे छोड़ दिया है। …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 23 Jun 2026 11:47:03 AM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 11:47:50 AM (IST)

NFHS-6 की रिपोर्ट: मध्य प्रदेश में दोगुना हुआ हेल्थ इंश्योरेंस का दायरा, स्वास्थ्य बीमा के मामले में गांवों ने शहरों को पछाड़ा
प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. मप्र में 38% से सीधे 73.6% पर पहुंचा स्वास्थ्य बीमा का आंकड़ा
  2. शहरी क्षेत्रों में 67.2% तो ग्रामीण इलाकों में 76% आबादी सुरक्षित
  3. आयुष्मान योजना की सफलता और कोरोना के बाद बढ़ी जागरूकता से आया बदलाव

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक बेहद सुखद बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-छह के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब हर तीन में से लगभग दो से अधिक नागरिक किसी न किसी स्वास्थ्य बीमा या वित्तीय योजना के दायरे में सुरक्षित हैं।

इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य बीमा के मामले में प्रदेश के ग्रामीण इलाकों ने शहरी क्षेत्रों को काफी पीछे छोड़ दिया है। यह बदलाव प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे में आ रहे जमीनी सुधारों और सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत योजना की सफलता को बयां करता है।

लगभग दोगुना हुआ दायरा गांवों में 76 प्रतिशत परिवार सुरक्षित

पिछले सर्वे (एनएफएचएस-5) की तुलना में प्रदेश में स्वास्थ्य बीमा का कवरेज लगभग दोगुना हो गया है। एनएफएचएस-पांच के दौरान प्रदेश में केवल 38.1 प्रतिशत परिवार ही किसी स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े थे, जो अब एनएफएचएस-छह में बढ़कर 73.6 प्रतिशत हो गए हैं।

शहरों से आगे निकले गांव

जहां शहरों में 67.2 प्रतिशत सामान्य सदस्य स्वास्थ्य बीमा के दायरे में हैं, वहीं ग्रामीण भारत में यह आंकड़ा 76.0 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यानी ग्रामीण क्षेत्रों के 100 में से 76 परिवारों के पास अब इलाज के लिए वित्तीय सुरक्षा कवच मौजूद है।

इसलिए आया यह बदलाव

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाएं हैं। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने सीधे तौर पर ग्रामीण और गरीब परिवारों को कवर किया है। इसके अलावा, कोरोना महामारी के बाद से लोगों में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी जागरूकता ने भी इस आंकड़े को बढ़ाने में मदद की है।

इलाज के खर्च से मिली मुक्ति

प्रदेश में पहले यह देखा जाता था कि गंभीर बीमारी होने पर ग्रामीण परिवारों को अपनी जमीन-जायदाद बेचनी पड़ती थी या कर्ज के जाल में फंसना पड़ता था। लेकिन अब 73.6 प्रतिशत आबादी के पास स्वास्थ्य बीमा होने से वे अस्पतालों में मुफ्त या रियायती दरों पर इलाज करा रहे हैं।



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