मध्य प्रदेश में मानसून का इंतजार लंबा होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून की दस्तक अभी कम से कम चार दिन और टल सकती है। मानसून की देरी के कारण कई जिलों में गर्मी और उमस बढ़ गई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में लू का असर भी देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने सोमवार को नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी में लू चलने की चेतावनी जारी की है। जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के जिलों में अगले चार दिनों तक हीटवेव जैसी स्थिति बने रहने की संभावना है। दिन में गर्म हवाएं चल सकती हैं, जबकि शाम के समय मौसम बदलने के आसार हैं।

21 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश के आसार

गर्मी के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का दौर भी जारी रहेगा। झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, कटनी, दमोह, सागर, विदिशा और अशोकनगर समेत 21 से अधिक जिलों में तेज हवा और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

रायसेन में ढाई इंच बारिश, भोपाल भी भीगा

रविवार को प्रदेश के कई जिलों में मौसम बदला रहा। रायसेन में सबसे अधिक 61 मिमी यानी करीब ढाई इंच बारिश दर्ज की गई। भोपाल में दोपहर बाद तेज बारिश हुई, जबकि सतना, जबलपुर, खजुराहो, नौगांव और सिवनी में भी बारिश का दौर बना रहा।

तापमान में गिरावट, दतिया सबसे गर्म

बारिश और बादलों की आवाजाही के कारण कई शहरों में तापमान में कमी आई। भोपाल में अधिकतम तापमान 35.3 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में 37.1 डिग्री, ग्वालियर में 39.7 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री और जबलपुर में 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दतिया प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

10 दिन पीछे चल रहा मानसून

सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश में मानसून 15 जून तक प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार 22 जून तक इसकी एंट्री नहीं हो सकी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून 23 जून के आसपास छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ेगा और इसके बाद 25 जून के बाद मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है।

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जून में 48 फीसदी कम बारिश

मानसून की देरी का असर वर्षा के आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है। जून महीने में अब तक प्रदेश में सामान्य से 48 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में स्थिति ज्यादा खराब है, जहां सामान्य से 69 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। प्रदेश के 55 में से 45 जिले बारिश के मामले में पीछे चल रहे हैं।

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किसानों की बढ़ी चिंता

बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की बुवाई प्रभावित हो रही है। सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी फसलों की बुवाई का काम अटका हुआ है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में पर्याप्त नमी के लिए कम से कम चार इंच बारिश जरूरी है, तभी बोवनी करना सुरक्षित रहेगा। कई जिलों में मानसून आने की उम्मीद में किसानों ने पहले ही सोयाबीन की बुवाई कर दी थी। अब बारिश नहीं होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे लागत भी बढ़ेगी।



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