उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवाद गहराने लगा है। धार्मिक स्थलों को हटाए जाने की आशंका के बीच शहर काजी खलीकुर्रह्मान ने प्रशासन को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर किसी भी तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। जुम्मे की नमाज के बाद छत्रीचौक स्थित शाही मस्जिद में मीडिया से बातचीत करते हुए शहर काजी ने प्रशासन को चश्मे के नंबर का उदाहरण देकर संतुलित और निष्पक्ष कार्रवाई की नसीहत दी।
‘चश्मे के नंबर बराबर रहें’, शहर काजी का संदेश
शहर काजी खलीकुर्रह्मान ने कहा कि चश्मे के नंबर बराबर रहने चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक की नजर कमजोर रहे और दूसरे की तेज हो जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की असमानता से पहले भी नुकसान हो चुका है। उनके इस बयान का आशय था कि यदि चौड़ीकरण के दौरान केवल मस्जिदों और मजारों पर कार्रवाई की गई और मंदिरों को छोड़ दिया गया, तो इसे न्यायसंगत नहीं माना जाएगा। उन्होंने प्रशासन से सभी धार्मिक स्थलों के प्रति समान नीति अपनाने की मांग की।
‘पहले भी नुकसान हुआ, अब दोबारा नहीं होने देंगे’
शहर काजी ने कहा कि अतीत में भी विकास कार्यों के नाम पर हुई कुछ कार्रवाइयों से मुस्लिम समाज को नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसा दोबारा नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध केवल मस्जिदों और मजारों तक सीमित नहीं है। यदि चौड़ीकरण के दौरान मंदिरों को भी तोड़ा जाता है, तो उसका भी विरोध किया जाएगा। उनका कहना था कि सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों का सम्मान होना चाहिए और कार्रवाई में किसी तरह का पक्षपात नहीं होना चाहिए।
धार्मिक स्थलों को हटाने का किया विरोध
शहर काजी ने कहा कि चौड़ीकरण के नाम पर धार्मिक स्थलों को हटाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों को नहीं तोड़ा जाना चाहिए और यदि ऐसा किया गया तो स्थिति ठीक नहीं होगी। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि विकास कार्यों के साथ धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान किया जाए।
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गंगा-जमुनी तहजीब पर जताई चिंता
शहर काजी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां शहर की गंगा-जमुनी तहजीब के लिए अच्छी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जो हालात बन रहे हैं, अल्लाह न करे कि वे आगे बढ़ें। उनका कहना था कि समाज को जिस दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही है, वह शहर की सामाजिक एकता और सौहार्द के लिए ठीक नहीं है।
नुमाइंदा कमेटी का गठन
इस मुद्दे को लेकर शहर काजी ने बताया कि इमामों और समाज के प्रमुख लोगों की मौजूदगी में एक नुमाइंदा कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि इसी कमेटी के बैनर तले समाज के लोग एकजुट होकर आगे की रणनीति तय करेंगे और प्रशासन के साथ संवाद भी करेंगे।
