शिक्षा विभाग ने स्वैच्छिक ट्रांसफर के लिए पोर्टल खोल दिया है, लेकिन 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त की वजह से ज्यादातर शिक्षक आवेदन ही नहीं कर पा रहे है …और पढ़ें

HighLights
- स्वैच्छिक ट्रांसफर पोर्टल 24 जून तक खुला, लेकिन शर्त सख्त।
- 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस न होने से अधिकतर शिक्षक बाहर।
- ई-अटेंडेंस ऐप की खामियों से शिक्षक परेशान हैं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शिक्षा विभाग में स्वैच्छिक रूप से ट्रांसफर चाहने वाले शिक्षकों के लिए पोर्टल खुल गया है और वे 24 जून तक आवेदन कर सकते हैं, लेकिन जिले के शिक्षक जो अपना ट्रांसफर कराना चाहते है, उनमें से अधिकतर विभाग की एक ट्रांसफर पालिसी के बिंदु की वजह से बाहर हो गए हैं।
यानि वे आवेदन ही नहीं कर सकते। यह बिंदु है कि शिक्षकों की 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस होना चाहिए। इस बिंदु की वजह से शिक्षक असहाय सा महसूस कर रहे हैं। विभाग से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि अब ट्रांसफर उन्हीं के होंगे, जो लोक शिक्षण विभाग के मुख्यालय में अपने प्रयास कर लेंगे।
18 जून से खुला शिक्षकों के लिए पोर्टल
- यहां बता दें प्रदेश में ट्रांसफरों पर बैन हटने के बाद शिक्षा विभाग ने अपनी ट्रांसफर नीति बनाई। इस नीति के तहत पहले 17 अप्रैल तक प्रशासनिक स्तर पर ट्रांसफर होना था। उसके बाद 18 जून से उन शिक्षकों के लिए पोर्टल खोल दिया जाएगा, जो अपना ट्रांसफर किसी दूसरी जगह पर कराना चाहता है।
- प्रशासनिक स्तर के ट्रांसफर विभाग अपने स्तर पर करता है, इसमें शिक्षक को विभिन्न एलाउंस लेने की पात्रता रहती है, लेकिन स्वैच्छिक ट्रांसफर में ये एलाउंस नहीं मिलते। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर हुए ट्रांसफर की सूची अभी तक जिला शिक्षा कार्यालय में नहीं आई है। इससे अभी पता नहीं है कि कितने शिक्षकों का ट्रांसफर हुआ है।
जिला अधिकारियों के नहीं अब डीपीआइ के चक्कर लगा रहे शिक्षक
शिक्षा विभाग के लोगों के मुताबिक जिले के जो शिक्षक स्वैच्छिक रूप से ट्रांसफर की चाहत रखत हैं, अब स्थानीय शिक्षा अधिकारियों के चक्कर लगाने की जगह सीधे भोपाल डीपीआइ में चक्कर लगा रहे हैं, क्योंकि ई-अटेंडेंस कम है और ट्रांसफर भी डीपीआइ से होना है। सभी डीपीआइ में ही अपने रसूखों का उपयोग कर ट्रांसफर का प्रयास कर रहे हैं।
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पोर्टल खुल गया है स्वैच्छिक ट्रांसफर
चाहने वाले शिक्षकों के लिए पोर्टल खुल गया है वे आवेदन कर सकते हैं। हालांकि अभी प्रशासनिक तौर पर जिनके ट्रांसफर हुए हैं, उनकी भी सूची अभी तक नहीं आई है। पुष्पा ढोढ़ी, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी
ई-अटेंडेंट एप की खामियों की वजह भी बनी परेशानी
- शिक्षक संघ के पदाधिकारी अरविंद दीक्षित के मुताबिक जिले में कई शिक्षक ऐसे हैं, जो सालों से एक ही स्कूल में है और वे अपने घर के पास या अन्य जगह पर स्वेच्छिक ट्रांसफर कराना चाहते हैं। वे भी 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस के नियम को लेकर फंसा सा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि जिले में ऐसा कोई शिक्षक नहीं है जिसकी पूरे साल में 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस हो।
- दीक्षित के मुताबिक वे शिक्षक भी इस पात्रता से बाहर है, जो नियमित तौर पर ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। क्योंकि ई-अटेंडेंस एप में कभी नेटवर्क काम नहीं करता, कभी फेस नहीं मिलता तो कभी स्कूल में होते हुए भी वह स्कूल से दूर बताता है।
- ऐसे में अधिकतर शिक्षकों की ई-अटेंडेंस कम है। ऐसे में बहुत कम ही शिक्षक ऐसे मिलेंगे जिनकी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से अधिक हो। ऐसे में स्वैच्छिक रूप से ट्रांसफर चाहने वाले शिक्षक आवेदन ही नहीं कर पाएंगे।
