हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट के धन और संपत्ति के कुप्रबंधन की शिकायतों पर रजिस्ट्रार लोक न्यास ने जांच के बाद जिला न्यायालय से निर्देश मांगे थे। …और पढ़ें

HighLights
- टेक्निकल ग्राउंड पर खारिज नहीं हो सकती जांच
- 2019 में ही खत्म हो चुका था कार्यकारिणी का कार्यकाल
- ग्वालियर जिला कोर्ट को 6 महीने में निर्णय के निर्देश
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास के प्रबंधन और संपत्ति में कथित गड़बड़ियों से जुड़े मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति आशीष श्रोती ने प्रथम अपील स्वीकार करते हुए 15 नवंबर 2022 को जिला न्यायालय द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट के धन और संपत्ति के कुप्रबंधन की शिकायतों पर रजिस्ट्रार लोक न्यास ने जांच के बाद जिला न्यायालय से निर्देश मांगे थे, लेकिन जिला न्यायालय ने तकनीकी आधारों पर उस संदर्भ को खारिज कर दिया, जबकि मामले का गुण-दोष के आधार पर परीक्षण किया जाना चाहिए था।
न्यायालय ने माना कि वर्ष 2019 में ट्रस्ट की कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो चुका था, इसलिए रजिस्ट्रार स्वयं न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करने के लिए सक्षम था।
हाईकोर्ट ने प्रकरण को दोबारा सुनवाई के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ग्वालियर को भेजते हुए सक्षम न्यायालय से छह माह के भीतर निर्णय करने और ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी का चुनाव जल्द कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूर्व कार्यकारिणी को कार्य जारी रखने की अनुमति वाला आदेश भी स्वतः निरस्त कर दिया गया।
