राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में सोमवार को मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस सड़कों पर उतर आई। युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यश लखन घनघोरिया के निर्देश पर प्रदेशभर में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए गए। इस दौरान भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, मुरैना, मंदसौर समेत सभी जिलों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले दहन किए गए। भोपाल में पीसीसी के बाहर आयोजित कार्यक्रम में यूथ कांग्रेस के काफी कम कार्यकर्ता पहुंचे। हालांकि यहां पहले से पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। 


प्रदेशभर में प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन

युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर जिला कलेक्टरों के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त और प्रदेश निर्वाचन अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि नामांकन निरस्त करने की कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है।

 घनघोरिया ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना

युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यश लखन घनघोरिया ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग अपनी संवैधानिक निष्पक्षता खो चुका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी आधारों पर निरस्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने दावा किया कि यह फैसला विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश का हिस्सा है। घनघोरिया ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष और स्वतंत्र होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इसके विपरीत दिखाई दे रही हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।

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चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई है। सोमवार को युवा कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद मंगलवार को एनएसयूआई विरोध प्रदर्शन करेगी, जबकि बुधवार को महिला कांग्रेस चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलेगी। कांग्रेस संगठन इसे लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई बताते हुए प्रदेशभर में जनजागरण अभियान भी चला रहा है।

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लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताई

युवा कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल एक प्रत्याशी के नामांकन का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और संविधान की रक्षा का मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।



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