उज्जैन में खरीफ सीजन की बुवाई शुरू होने से पहले ही किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। डीजल की बढ़ती कीमतों के बाद अब रासायनिक खादों के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी ने किसानों की लागत और बढ़ा दी है। जिले के किसानों का कहना है कि खेती पहले से ही घाटे का सौदा बनती जा रही है, ऐसे में खाद, बीज और डीजल की महंगाई ने उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।

किसानों के अनुसार एनपीके और पोटाश खाद की कीमतों में 175 रुपये से लेकर 800 रुपये प्रति बोरी तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं दूसरी ओर खाद वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था और बार-बार सर्वर डाउन होने की समस्या ने हालात को और जटिल बना दिया है।

कच्चे माल की कमी से बढ़े खाद के दाम

खाद व्यापारी मयंक गर्ग के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित होने से खाद निर्माण कंपनियों की लागत बढ़ी है। इसका सीधा असर बाजार कीमतों पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि मांग अधिक होने और आपूर्ति सीमित रहने के कारण खाद की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि व्यापारी भी इस स्थिति से परेशान हैं, क्योंकि कंपनियों से पर्याप्त मात्रा में स्टॉक नहीं मिल पा रहा। ऐसे में किसानों की नाराजगी का सामना भी व्यापारियों को करना पड़ रहा है।

ई-टोकन और सर्वर समस्या से किसान परेशान

खाद वितरण के लिए फार्मर आईडी और ई-टोकन प्रणाली लागू की गई है, लेकिन कई केंद्रों पर तकनीकी समस्याएं किसानों की परेशानी बढ़ा रही हैं। किसानों का आरोप है कि घंटों लाइन में लगने के बावजूद कई बार सर्वर डाउन हो जाता है और टोकन जारी नहीं हो पाते। कुछ किसानों ने बताया कि टोकन मिलने के बाद भी तकनीकी खामी के कारण खाद नहीं मिल पाती और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।

किसानों ने जताई नाराजगी

निनोरा गांव के किसान रमेश पटेल ने कहा कि डीजल, बीज और खाद सभी महंगे हो गए हैं। ऐसे में खेती करना लगातार कठिन होता जा रहा है। वहीं किसान हेमंत सांखला ने आरोप लगाया कि आम किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि कुछ लोगों को आसानी से खाद उपलब्ध हो जाती है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर खाद नहीं मिली तो बुवाई प्रभावित होगी और इसका असर उत्पादन पर भी दिखाई देगा।

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उत्पादन पर पड़ सकता है असर

उज्जैन जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान करीब तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन और मक्का की बुवाई प्रस्तावित है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाद की उपलब्धता और कीमतों की समस्या बनी रही तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

किस खाद पर कितनी बढ़ी कीमत?


  • खाद का प्रकार    पुरानी कीमत (रु.)    नई कीमत (रु.)    बढ़ोतरी (रु.)

  • एनपीके 12-32-16    1900                  2450                550

  • एनपीके 16-16-16    1725                  2050                325

  • एनपीके 24-24-24    1900                  2300                400

  • एनपीके 19-19-19    1600                  2400                800

  • पोटाश                     1800                 1975                175

कृषि विभाग ने क्या कहा?


कृषि विभाग के उप संचालक यू.एस. तोमर का कहना है कि विभाग को फिलहाल किसानों की ओर से किसी बड़ी समस्या की औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पुराने स्टॉक का वितरण पुराने दामों पर किया जा रहा है। नए स्टॉक के आने पर संशोधित दरें लागू होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं सर्वर डाउन होने जैसी समस्या सामने आती है तो उसका तत्काल समाधान किया जा रहा है।

 



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