श्योपुर के ददूनी गांव में पागल हो चुके आवारा व पागल कुत्ते ने तड़के से ही हमले शुरू कर दिए। महज कुछ घंटों के भीतर कुत्ते ने 4 साल की मासूम समेत 7 लोगों और 4 दुधारू भैंसों को काटकर लहूलुहान कर दिया। हमले की चपेट में सबसे ज्यादा 80 वर्षीय बुजुर्ग नारायण सिंह जाट आए, जिनके चेहरे और जांघ पर गहरे जख्म होने से 35 टांके लगे हैं। घटना के बाद से पूरा गांव सहमा हुआ है। लोग बच्चों को घरों में कैद कर बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।
गुरुवार रात करीब 10 बजे से कुत्ते की हरकतें बदल गईं थीं। सबसे पहले उसने खेत से लौट रहे गोलू मेहरा पर झपट्टा मारा। शोर सुनकर दौड़े सत्येंद्र जाट और दीनदयाल मेहरा को भी कुत्ते ने काट लिया। रातभर गांव के कुत्ते भौंकते रहे, लेकिन अंधेरे में किसी को अंदाजा नहीं था कि सुबह क्या होने वाला है।
चारा डालने के वक्त बनाया शिकार
सुबह नारायण सिंह जाट मवेशियों को चारा डालने बाड़े की ओर जा रहे थे। तभी घात लगाए कुत्ते ने उन पर हमला बोल दिया। सीधे मुंह और गाल पर काटा। बुजुर्ग लहूलुहान होकर गिर पड़े। चीख सुनकर परिजन दौड़े और लाठी-डंडों से कुत्ते को भगाया। पर तब तक कुत्ता जांघ पर भी कई जगह काट चुका था। परिजन तुरंत उन्हें श्योपुर जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने 35 टांके लगाये फिलहाल अस्पताल में भर्ती है हालत गंभीर बताई है।
‘भैंसों के थन और पैर पर गहरे जख्म हैं’
इसके बाद कुत्ता गांव की गलियों में दौड़ता रहा। आंगन में खेल रही चार वर्षीय भक्ति जाट को उसने पैर में काट लिया। बीच-बचाव करने आए बीपी सिंह और हरनाथ मेहरा भी घायल हो गए। कुत्ते का आतंक यहीं नहीं रुका। उसने गांव के बाड़ों में बंधी चार भैंसों को भी नोच डाला। पशुपालक कल्लू जाट ने बताया, “भैंसों के थन और पैर पर गहरे जख्म हैं। दूध देना बंद कर दिया। रोज का हजार रुपये का नुकसान हो रहा है।”
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सभी घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां एंटी-रेबीज इंजेक्शन और टिटनेस के टीके लगाए गए। नारायण सिंह को छोड़कर बाकी को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। बीएमओ डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि कुत्ते के लक्षण रेबीज से ग्रसित होने जैसे लग रहे हैं। सभी घायलों को पांच इंजेक्शन का कोर्स पूरा करना जरूरी है।
घटना के बाद से ददूनी में दहशत है। स्कूल जाने वाले बच्चे घरों में बंद हैं। महिलाएं पानी भरने अकेले नहीं जा रही हैं। ग्रामीणों ने लाठी लेकर पहरा देना शुरू कर दिया है। सरपंच प्रतिनिधि रामस्वरूप मीणा ने बताया कि ग्राम पंचायत के पास कुत्ता पकड़ने के संसाधन नहीं हैं। “हमने पशु चिकित्सा विभाग और नगर पालिका को सूचना दे दी है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी और पानी की कमी से कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं।
