इतिहास की सामग्री के प्रति जनरुचि कायम रखने के इरादे से संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1983 से संग्रहालय दिवस घोषित किया है, पर इंदौर की पूर्ववर्ती होलकर रियासत के राजा इतिहास की यादों को सहेजने के प्रति 1923 से ही सजग रहे है।
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इतिहास की सामग्री के प्रति जनरुचि कायम रखने के इरादे से संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1983 से संग्रहालय दिवस घोषित किया है, पर इंदौर की पूर्ववर्ती होलकर रियासत के राजा इतिहास की यादों को सहेजने के प्रति 1923 से ही सजग रहे है।
इसकी शुरुआत सामान्य स्तर पर सामग्री संग्रह करने से हुई। शुरू में इस संग्रहालय का नाम नररत्न मंदिर था। अक्तूबर 1929 में इंदौर में केंद्रीय संग्रहालय की विधिवत स्थापना की गई। 1966 में वर्तमान संग्रहालय छावनी के समीप पुराने आगरा-बॉम्बे मार्ग पर स्थानांतरित किया गया, जो आज भी मालवा-निमाड़ की पुरातत्व संपदा के संग्रह का विशाल केंद्र है।