देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ राकेश सिंघई ने कहा है कि नई सोच का नया भारत बनाना जरूरी है लेकिन उसमें सबसे ज्यादा जरूरी है कि हमारी संस्कृति का समावेश होना चाहिए। आज विश्व का सबसे युवा देश भारत है और इस देश के युवा नवाचार करने और देश को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए कृत संकल्पित हैं।वे शनिवार शाम जाल सभागृह में अभ्यास मंडल की 66वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यान माला के वक्ता के रूप में मौजूद थे।

 

नया भारत नई सोच विषय पर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस विषय पर चिंतन करने से पहले हमें बीते एक दशक में देश को प्राप्त हुए गौरव पर ध्यान देना होगा। वर्ष 2047 के जिस विकसित भारत की हम कल्पना कर रहे हैं उसका आधार तैयार होना शुरू हो गया है। बीते वर्षों में जो काम हुआ है उससे इंडिया से भारत का निर्माण शुरू हो गया है। इस समय भारत पूरे विश्व में डिजिटलाइजेशन का नायक है। विश्व के किसी भी देश में किसी भी सरकार के द्वारा स्वास्थ्य बीमा की इतनी बड़ी योजना का संचालन नहीं किया जा रहा है, जितना की भारत में हो रहा है।

उन्होंने कहा कि वैसे तो कई देश के लोग चांद पर गए हैं लेकिन भारत के वैज्ञानिक चांद में उस स्थान पर पहुंच गए जहां आज तक कोई नहीं पहुंचा है। न्यूक्लियर एनर्जी में भी सबसे तेज रिएक्टर पर भारत में काम हो रहा है। सोलर पार्क का निर्माण भारत में हो रहा है। लंबे एक्सप्रेस वे, मेट्रो के रास्ते और इस तरह अधो संरचना, विकास की दिशा में बहुत ज्यादा काम भारत में हो रहा है। पूरे विश्व में यूपीआई से जितना भुगतान होता है उसमें से आधा भुगतान अकेले भारत में होता है। हमें यह ध्यान देना होगा कि 12 साल पहले जहां हमारे देश में मात्र 500 स्टार्टअप थे, वहां अब इनकी संख्या 2 लाख से ज्यादा है।

 

उन्होंने कहा कि हमेशा कहा जाता है कि पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के बीच में जेनरेशन गैप है लेकिन हमें इस गेप को टैप करना आना चाहिए। अब तो वर्क फ्रॉम होम भी हमारी आदत में आ गया है। हमें नई सोच का नया भारत तैयार करने में हमारी संस्कृति को भी शामिल रखना होगा। आज विश्व के दूसरे देशों के लोग हमारी संस्कृति की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में हमें अपनी संस्कृति को अपने से दूर नहीं होने देना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता अभ्यास मंडल की व्याख्या माला समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक चितले ने की। कार्यक्रम का संचालन मनीषा गौर ने किया। विषय का प्रवर्तन माला सिंह ठाकुर ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन अशोक जायसवाल ने किया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह अशोक कोठारी और सुमन ज्ञानी ने भेंट किए।



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