न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Abhishek Chendke

Updated Fri, 15 May 2026 08:23 PM IST

धार भोजशाला विवाद वर्षों पुराना है। वर्ष 2003 के बाद एएसआई के आदेश के कारण धार के हालात बिगड़े और कानून व्यवस्था भी बिगड़ी। आईए जानते है कि धार भोजशाला में कब क्या हुआ?


Dhar Bhojshala: On Friday, when Vasant Panchami came, Dhar's patience was tested.

भोजशाला धार
– फोटो : सोशल मीडिया



विस्तार

धार भोजशाला विवाद 30 साल पुराना है। वर्ष 1995 में पहली बार दो पक्षों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद भोजशाला चर्चा में आई। विवाद बढ़ने पर एएसआई ने 2023 में आदेश दिया कि हर शुक्रवार को भोजशाला में नमाज अदा की जाएगी और हर मंगलवार को पूजा होगी। हिंदू समाज बसंत पंचमी पर भोजशाला में सुबह से लेकर शाम तक यज्ञ करता है। जब भी बसंत पंचमी शुक्रवार को आई, तो धार के धैर्य की परीक्षा हुई। तीन-चार बार धार में हालात बिगड़े और कर्फ्यू भी लगाया गया।

 


  • साल 1995: धार में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ। विवाद का केंद्र भोजशाला था। तब प्रशासन ने मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी।

  • वर्ष 1997: तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भोजशाला में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी और मंगलवार की पूजा पर भी प्रतिबंध लगाया। इसका काफी विरोध हुआ और दो माह बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया।

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  • वर्ष 2003: मंगलवार को हिंदू परिवारों को भोजशाला में शर्तों के साथ पूजा की अनुमति दी गई। यह आदेश भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने दिया। इसके बाद धार में दो समुदायों के बीच विवाद और हिंसा हुई।

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  • वर्ष 2013: बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन आए। भोजशाला में फिर हालात बिगड़े। परिसर को खाली कराने के लिए प्रशासन ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।

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  • वर्ष 2016: बसंत पंचमी शुक्रवार को आई। इस बार चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की गई। माहौल गरमाया, लेकिन कर्फ्यू जैसे हालात नहीं बने।

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  • वर्ष 2023: शुक्रवार को बसंत पंचमी आई। तय संख्या में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई और सुबह से शाम तक हिंदू समाज ने हवन किया।



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