मध्य प्रदेश में पुलिस हिरासत से आरोपियों के फरार होने के मामलों ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में पुलिस कस्टडी से आरोपी भागने के सबसे ज्यादा मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में इस तरह की कुल 691 घटनाएं सामने आईं, जिनमें अकेले मध्य प्रदेश से 72 मामले दर्ज हुए। इस सूची में बिहार 58 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि राजस्थान और ओडिशा में 57-57 मामले सामने आए।

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रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आरोपी केवल पुलिस हिरासत से ही नहीं, बल्कि लॉकअप जैसी सुरक्षित जगहों से भी फरार होने में सफल रहे। प्रदेश में 6 आरोपी सीधे लॉकअप से भाग निकले, जबकि 83 आरोपी पुलिस निगरानी के दौरान चकमा देकर फरार हो गए। प्रदेश में कुल 89 फरारी की घटनाएं सामने आईं, जिनमें से 72 मामलों में औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने इनमें से 53 आरोपियों को दोबारा गिरफ्तार कर लिया, लेकिन 36 आरोपी अब भी गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं। 

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एनसीआरबी की रिपोर्ट ने प्रदेश की पुलिस व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में आरोपी फरार होने के बावजूद किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस हिरासत से आरोपियों का लगातार फरार होना सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। यदि निगरानी और जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

 



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