इंदौर क्राइम ब्रांच ने शहर में चल रहे एक बड़े ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए सात जालसाजों को हिरासत में लिया है। यह गिरोह एक अत्याधुनिक सर्वर आधारित सिस्टम का उपयोग करके काफी समय से अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। पुलिस की छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नकदी, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल दस्तावेज बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन किया जा चुका है।
दिल्ली और मुंबई के सर्वर से जुड़ा था नेटवर्क
पकड़ा गया यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से अपना जाल फैलाए हुए था। जांच में यह खुलासा हुआ है कि सट्टेबाजी के इस कारोबार को दिल्ली और मुंबई स्थित डायमंड सर्वर के माध्यम से नियंत्रित किया जा रहा था। इस हाईटेक बुकिंग सिस्टम के जरिए बड़े पैमाने पर दांव लगाए जाते थे। पुलिस ने मौके से एक लाख चालीस हजार रुपये की नगद राशि के साथ ही तीन लैपटॉप और 39 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इसके अलावा कई संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी और आईडी भी मिली हैं जो करोड़ों के ट्रांजैक्शन की पुष्टि करती हैं।
शिवपुरी और गुना के रहने वाले हैं आरोपी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान शशांक अग्रवाल, मुकेश गुप्ता, निखिल कौशल, शुभम कौशल, जतिन शर्मा, अर्पित तिवारी और प्रियांश जैन के रूप में हुई है। ये सभी मुख्य रूप से शिवपुरी और गुना क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह गिरोह सट्टेबाजी के लिए विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग करता था और फंड ट्रांसफर के लिए फर्जी बैंक खातों का सहारा लेता था। फिलहाल क्राइम ब्रांच इस पूरे सिंडिकेट की गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि इसके पीछे छिपे अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
दुबई से जुड़े होने की आशंका
मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस सट्टा नेटवर्क के तार न केवल दिल्ली और मुंबई बल्कि दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों से भी जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं। पुलिस को संदेह है कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड विदेशी धरती से ऑपरेट कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अन्य फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। आने वाले दिनों में पुलिस इस मामले में कुछ और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां कर सकती है जिससे कई बड़े नामों का खुलासा होने की उम्मीद है।
