इंदौर की मेट्रो ट्रेन में यात्रियों की भारी कमी है। 17 किलोमीटर तक के संचालन की तिथि तय नहीं हो पाई है और उससे पहले ही कोच और मेट्रो स्टेशन किराए पर देने का विचार अधिकारियों के मन में आ गया। इस प्रोजेक्ट पर अब तक साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। हर महीने मेट्रो ट्रेन के संचालन पर आठ लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। अफसरों का ये नवाचार शहरवासियों के गले नहीं उतर रहा है।
स्टेशनों पर स्टाफ तैनात है, लेकिन रोजाना 100 यात्री भी ट्रेन में सफर नहीं कर रहे हैं। मुश्किल से महीनेभर में दो-ढाई लाख रुपये की कमाई हो रही है और अब खर्च निकालने के लिए अधिकारियों ने पांच से सात हजार रुपये प्रति घंटा किराए पर मेट्रो कोच और स्टेशन देने का निर्णय लिया है। यदि चलती ट्रेन में पार्टी करनी होगी, तो उसके लिए कोच का किराया सात हजार रुपये लगेगा। किट्टी पार्टी, जन्मदिन व अन्य आयोजनों के लिए कोच और मेट्रो स्टेशन किराए पर दिए जाएंगे। मेट्रो चलाने पर हर दिन आठ लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर खूब प्रतिक्रियाएं आईं और मीम भी बनाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जनता के टैक्स की कमाई मेट्रो जैसे भारी-भरकम प्रोजेक्ट में लगाई गई है और अब उसे कोच को पांच-सात हजार रुपये में किराए पर देना अजीब लग रहा है। देश के किसी अन्य शहर में इस तरह मेट्रो स्टेशन के उपयोग के बारे में नहीं सुना गया।
मेट्रो ट्रेन को मजाक बना डाला
कांग्रेस प्रवक्ता अमित चौरसिया ने कहा कि मेट्रो ट्रेन को अधिकारियों ने मजाक बनाकर रख दिया है। प्रोजेक्ट के नाम पर लोगों के मकान-दुकान तोड़े जा रहे हैं और उन स्टेशनों पर किट्टी पार्टियां होंगी। अधिकारियों की प्राथमिकता 17 किलोमीटर लंबे रूट पर मेट्रो के संचालन की होनी चाहिए, लेकिन शहरवासियों का सफर आसान करने के बजाय वे स्टेशन और कोच को पार्टियों के लिए किराए पर दे रहे हैं। सरकार को भी इस तरह के अजीबोगरीब फैसलों पर विचार करना चाहिए।
