नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जेएएच के मेडिसिन विभाग में 28 अप्रैल को रैबीज होने के चलते जिस युवक को भर्ती कराया गया था, उसने शनिवार सुबह दम तोड़ दिया। माणिक की गोठ राक्सी पुल निवासी राजू कुशवाह, पिता हुकुम सिंह, को घर के बाहर कुत्ते ने काटा था। रैबीज से 87 दिन में यह सातवीं मौत है।

राजू को पानी नहीं पी पाने और पानी देखकर सहमने पर हजार बिस्तर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया था। स्वजन ने बताया कि राजू घर के बाहर कुत्ते को खिला रहा था, इसी दौरान कुत्ते ने उसकी उंगली में काट लिया था। तब सिर्फ टिटनेस का इंजेक्शन लगवाया गया था। कुत्ते के काटने के 20 दिन बाद राजू में रैबीज के लक्षण नजर आए थे।

रैबीज का यह सातवां मामला

बीते 2 माह 27 दिन में रैबीज से आठ लोग शिकार हो चुके हैं, जिनमें से सात की मौत हो गई। इनमें फरवरी में हुई मौतों में ग्वालियर निवासी किरण, टीकमगढ़ की 65 वर्षीय सेवाई बाई और दतिया निवासी छह वर्षीय हंस प्रजापति शामिल हैं।

इसके बाद छतरपुर निवासी अशोक, मुरार के गोलू और सबलगढ़ निवासी 21 वर्षीय सूरज की मौत हुई थी। अब सातवीं मौत ग्वालियर निवासी 36 वर्षीय राजू कुशवाह की हुई है।

विशेषज्ञ की सलाह

जीआरएमसी के पीएसएम विभाग के डॉ. अक्षत पाठक के अनुसार रैबीज एक लाइलाज बीमारी है। कुत्ता या बिल्ली काटने पर हमेशा सरकारी अस्पताल में ही वैक्सीन लगवानी चाहिए, क्योंकि यहां कोल्ड चेन का सख्त पालन होता है।

यदि घाव गहरा हो तो इम्युनोग्लोबिन का इंजेक्शन भी लगाया जाता है। इसलिए जानवरों के काटने को हमेशा गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी रैबीज के प्रति जागरूकता कम है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।



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